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ग्राम पंचायत भिरावटी में डेंगू का कहर एक की मौत दर्जनों पर मंडराया खतरा

गंदगी और लापरवाही से गांव में फैला संक्रमण प्रशासन में मचा हड़कंप

गुन्नौर। गुन्नौर धनारी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत भिरावटी इन दिनों डेंगू के कहर से जूझ रही है। गांव में अब तक दर्जनों लोग बुखार, सिर दर्द और बदन दर्द से पीड़ित पाए गए हैं। सबसे दर्दनाक घटना तब सामने आई जब गांव के रहने वाले विजेंद्र पुत्र कल्लू 40 वर्ष ने मुरादाबाद टीएमयू में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। विजेंद्र पिछले 6 दिनों से डेंगू से जूझ रहे थे। मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम पसर गया।

परिवार के एक दर्जन से ज्यादा लोग भी संक्रमित

मृतक विजेंद्र के परिवार में डेंगू का संक्रमण बुरी तरह फैल चुका है। उनके पिता कल्लू पुत्र गंगा सहाय 70 वर्ष, मां चंद्रावती 65 वर्ष, पत्नी कौशल 35 वर्ष, पुत्री कविता 12 वर्ष समेत परिवार के लगभग एक दर्जन से अधिक सदस्य डेंगू की चपेट में हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। इन सभी का इलाज फिलहाल जारी है।

गंदगी से पटा गांव, सफाई कर्मचारी नदारद

गांव वालों ने साफ आरोप लगाया कि 30 हजार आबादी व 12 हजार वोटरों वाली पंचायत में सिर्फ एक सफाई कर्मचारी तैनात है और वह भी ग्राम प्रधान के दबाव में उनके फार्म हाउस पर निजी कार्य करता रहता है। नतीजा यह है कि गांव की नालियों से लेकर गलियों और सड़कों तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है। अब तक गांव में न तो मच्छरनाशक दवा का छिड़काव हुआ और न ही कोई सफाई अभियान।

प्रशासन में मची हलचल

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने और एक मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट ने स्वास्थ्य विभाग को तत्काल निर्देश जारी किए और गांव में जांच एवं इलाज के आदेश दिए। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और संक्रमित लोगों का उपचार शुरू किया।

सरकार के आदेशों की खुली अवहेलना

सोचने वाली बात यह है कि जहां एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन और डेंगू-चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत भिरावटी में साफ नजर आ रहा है कि सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है और ग्राम प्रधान की दबंगई के कारण कर्मचारी सिर्फ निजी कामों में लगे हुए हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश

गांव वालों ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते छिड़काव और सफाई की व्यवस्था की होती तो हालात इतने भयावह न होते। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी ग्राम प्रधान और लापरवाह सफाई कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो।

बड़ा सवाल

क्या सरकारी मशीनरी सिर्फ कागजों में ही स्वच्छ भारत मिशन चला रही है।

कब तक ग्राम पंचायतों में जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ेगा।

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