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सत्य क्या है झूठ क्या है, अब अखबार तय करने लगे

सत्य क्या है, झूठ क्या, अख़बार तय करने लगे
आदमी की माँग को बाज़ार तय करने लगे

खाद पानी धूप पर फसलों को हक़ कितना मिले
आज कल खेतों में खर- पतवार तय करने लगे

कौन सी औषधि किसे, कितनी मिलेगी व्याधि में
वैद्य को बंधक बना बीमार तय करने लगे

मान लीजे धर्म पतनोन्मुख उसी दिन हो गया
आपकी यदि 'आस्था' सरकार तय करने लगे

राम कैसे थे, लखन कैसे थे, कैसी जानकी
आप तो बाज़ार के अनुसार तय करने लगे

ज़िन्दगी ने ठीक से प्रस्तावना लिक्खी न थी
लोग आए और उपसंहार तय करने लगे

अब यारों न्याय के मरने का मातम कीजिए
क्योंकि अब अपराध थानेदार तय करने लगे

कुंवर प्रताप यादवेंद्र सिंह यादव चंद्रवंशी उर्फ टाईगर भईया राष्ट्रीय अध्यक्ष वसुधैव कुटुंबकम्

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