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तुमसर बोल रहा- हमें चाहिए नगराध्यक्ष के रूप में पुनः अभिषेक कारेमोरे..

तुमसर: अगर इंसान में कुछ करने की चाह हो तो, वो सबकुछ बदल सकता है। भंडारा जिले के तुमसर नगर परिषद में ढाई साल के अल्प समयावधि में कुछ ऐसा ही बदलाव कर दिखाया था अभिषेक कारेमोरे ने, जिनके पिछले दिनों की याद कर अब तुमसर फिर नगराध्यक्ष के रूप में उनकी मांग कर रहा है।
अभिषेक कारेमोरे वर्ष 2014 से 2017 के बीच तुमसर नगर परिषद के नगराध्यक्ष रहे। इस दौरान वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के युवा जिलाध्यक्ष भी रहे। नगराध्यक्ष बनते ही उन्होंने सबसे पूर्व हाथ में झाड़ू पकड़ी और निकल पड़े तुमसर को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने।
अभिषेक कारेमोरे के कार्यकाल को याद करते हुए तुमसर निवासी बताते है कि वो पल तुमसर शहर के लिए यादगार रहा। कारेमोरे ने शहर की प्रगति, स्वच्छता, सुंदरता और नागरिक सुविधा के बेहतर से बेहतर कार्य किया।
शहर में शुद्ध पेयजलापूर्ति हेतु 47 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दिलाई। शहर को ओडी मुक्त (बाहरी शौच मुक्त)कराया। शासकीय निधि को तत्काल विकास कार्यों में खर्च कर शहर को ग्रीन और क्लीन कराने में अहम भूमिका निभाई। इसके लिए तुमसर नगर परिषद को विदर्भ में स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छ नगर परिषद घोषित किया गया।
अभिषेक कारेमोरे के नगराध्यक्ष रहते राज्य में ये पहली नगर परिषद रही जिसने आम नागरिकों से शहर के स्वच्छता और विकास के लिए दान लिया। विनम्रतापूर्वक की गई टैक्स वसूली में तुमसर अव्वल रहा। गार्डन, तालाब, डिवाइडर में पौधारोपण, एरिया फलक बोर्ड, चौराहों में सीसीटीवी कैमरे, कचरा गाड़ी, क्षेत्र में डस्टबीन, लाइब्रेरी सुशोभीकरण, नाली, सड़क ये सब कार्य नगराध्यक्ष अभिषेक कारेमोरे ने कर शहर को सुंदर बनाने किया।
पर्यावरण, स्वच्छता, कला एवं शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें बेंगलुरु में सोशल कन्सर्न एंड कम्युनिटी डेव्हलपमेंट इस थीसिस पर डॉक्टरेट (आचार्य) की उपाधि से सम्मानित किया गया। कारेमोरे भारत में उन 13 लोगो मे शुमार थे जिन्हें ये डॉक्टरेट की उपाधि मिली।
इतना ही नहीं, नगराध्यक्ष रहे अभिषेक कारेमोरे को स्वच्छ भारत अभियान के तहत तुमसर नगर परिषद को 56 से सीधा 86 ग्रेड पर लाने पर उन्हें मुंबई बुलाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान कारेमोरे ने ठाना था कि वो तुमसर नगर परिषद को नंबर- 1 बनाने का प्रयास करेंगे।
तुमसर शहर के लिए इतना बेहतर कार्य करने के बावजूद 2018 के चुनाव में वे नगराध्यक्ष का पद खो बैठे। परंतु उन्होंने हार नही मानी। वे निरंतर आम नागरिकों की आवाज बनकर संघर्ष करते रहे। जलापूर्ति योजना, घरकुल योजना के लाभार्थियों को उनका हक दिलाने लड़ाई लड़ी, नप शाला को तोड़कर कॉम्प्लेक्स बनाने का विरोध किया। शहर के हर छोटे बड़े विकास कार्यो को करने उनकी लड़ाई आज भी बदस्तूर जारी है।

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