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पिंपरी चिंचवड़ में विकास या दिखावा?

पिंपरी चिंचवड़, पुणे — शहर में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। शहर के कई पार्क आज भी केवल नाममात्र के पार्क बनकर रह गए हैं, जिनकी देखरेख के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। सवाल उठता है कि यह पैसा आता कहां से है और जाता कहां है?

सबसे बड़ा उदाहरण है जगताप डेयरी से चौक के अंदर का इलाका, जो वर्षों से जंगली भूमि की तरह पड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में 500 मीटर की पक्की सड़क तक नहीं है, न ही एक भी स्ट्रीट लाइट लगाई गई है।

हैरानी की बात तो यह है कि इसी रेज़िडेंशियल एरिया में पिंपरी चिंचवड़ पुलिस और नगर निगम की मौजूदगी में ओयो होटल और पार्लर धड़ल्ले से चल रहे हैं क्योंकि ये असम्भव है कि इतना बड़ा करोबार बिना नगर निगम और प्रशासन के अनुमति से शुरू किया जा सके। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सभी को पता है, मगर प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी का इंतज़ार कर रही है, ताकि बाद में औपचारिक कार्रवाई कर सके।

जैसा अक्सर कहा जाता है — घटना होने के बाद ही प्रशासन जागता है और पिंपरी चिंचवड़ इसका ज्वलंत उदाहरण बन चुका है।

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