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प्रतापगढ़ बिजली विभाग में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें मीटर रीडरों द्वारा बिल जमा कराने के नाम पर पैसे ठगने, जूनियर इंजीनियरों द्वारा

प्रतापगढ़ बिजली विभाग में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें मीटर रीडरों द्वारा बिल जमा कराने के नाम पर पैसे ठगने, जूनियर इंजीनियरों द्वारा रिश्वत लेने और बिजली चोरी के मामले शामिल हैं। उदाहरण के लिए, एक मीटर रीडर पर ₹1.12 लाख की धोखाधड़ी का आरोप है, जिसके बाद विभाग ने उसे निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, एक जेई को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।
धोखाधड़ी के प्रकार
बिल जमा कराने के नाम पर धोखाधड़ी: मीटर रीडर या अन्य कर्मचारी उपभोक्ताओं से बिल जमा करने के नाम पर पैसे ले लेते हैं, लेकिन बिल जमा नहीं करते और न ही पैसे लौटाते हैं। प्रतापगढ़ के पट्टी क्षेत्र में ऐसी एक घटना सामने आई है जिसमें मीटर रीडर पर ₹1.12 लाख की धोखाधड़ी का आरोप है।
रिश्वतखोरी: जूनियर इंजीनियर (जेई) जैसे अधिकारी बिजली कनेक्शन देने या अन्य काम करने के लिए रिश्वत की मांग करते हैं। कुंडा विद्युत उपकेंद्र में एक जेई को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
बिजली चोरी: कुछ लोग चोरी-छिपे बिजली का उपयोग करते हैं, जिसके लिए विभाग द्वारा नियमित चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं और पकड़े जाने पर एफआईआर दर्ज की जाती है।
हाल की घटनाएं
मीटर रीडर पर धोखाधड़ी का आरोप: सैफाबाद निवासी सुनील कुमार ने मीटर रीडर अमरनाथ यादव पर ₹1.10 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है, जिसके बाद पुलिस ने जांच के आदेश दिए हैं। इससे पहले भी उसी मीटर रीडर पर ₹1.12 लाख की धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसके बाद विभाग ने उसे निलंबित कर दिया था।
जेई की रिश्वतखोरी: विजिलेंस टीम ने कुंडा के एक जेई को बिजली कनेक्शन के नाम पर ₹5,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
बिजली चोरी के मामले: अंतू और पट्टी क्षेत्रों में चेकिंग अभियान के दौरान बिजली चोरी के तीन मामले दर्ज किए गए और 127 बकायेदारों के कनेक्शन काटे गए।
इन घटनाओं के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष और डर का माहौल है। विभाग उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इन घटनाओं के कारण विभाग की छवि धूमिल हो रही है।

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