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मानव की वर्तमान स्थिति पर चिंतन

देश 1947 में आजाद हुआ।26 जनवरी 1950 से गणतंत्र हुआ। संविधान सभा में जिस अम्बेडकर जी को जाने के लिए खिड़की दरवाजे के साथ रौशनीदानी भी बन्द कर दिया था । उसी बाबा साहेब को संविधान सभा के एक सदस्य को त्यागपत्र पुणे से दिलाकर, निर्विरोध सदस्य और कानून मंत्री भी बनाया। इतना ही नहीं संविधान सभा के प्रारुप समिति के अध्यक्ष भी । संविधान लिखते समय कुछ जनता को दी जाने वाली अधिकार से नेता नाराजगी भी प्रकट किया। उतना ही नहीं डॉ भीमराव अम्बेडकर साहेब इस्तीफा भी पटेल को दिया, लेकिन स्वीकार नहीं किया। सात सदस्यीय कमिटी विशेष परिस्थितियों में मदद भी नहीं किया। रात दिन एक करके संविधान जनता की राय को भी तरजीह देकर लिखा गया। कहने का तात्पर्य यह है की सभी भारतीय की विचारधारा को पत्र के माध्यम से लेकर संविधान में पिरोया गया। इसलिए पूरे भारतवर्ष का श्रेय संविधान लिखने में है। जैसे किसी देश की तरक्की सभी नेता और जनता मिनिस्टर मिलकर करते हैं, लेकिन श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है। उसी प्रकार संविधान निर्माण में पूरे प्रबुद्ध भारतीय नागरिक का हाथ है। लेकिन अंतिम निर्णय डाक्टर साहेब का ही रहा। दुनिया मानती है भारत का संविधान अच्छा है। फिर मनुवादी मानसिकता वाले लोग को पेट में दर्द क्यों हो रहा है। संविधान में पूरे भारतीय की भावनाओं को रखा गया है। सभी श्रेणियों की महिलाओं को बाल विवाह और बराबरी का अधिकार नील का पत्थर साबित हुआ ।दलित और महिलाओं की गुलामी किसी से छिपी नहीं है। पढ़ और सुनकर सभी भिज्ञ है। भारत दो भागों में बंटा, तीसरा भाग अछुतास्तान भी अंग्रेज देना चाहते थे। लेकिन बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर बंटवारे के विरोध में रहे। आज यदि दलित का अलग देश रहता तो सभी जाति की नौकरी चाकरी कौन करता। बिना मेहनत के दान दक्षिणा का लाभ किससे लेता। हल और गोबर नहीं छूनेवाले मानव के गोबर और हल कौन जोतता। इतनी जमीन से पैदावार कौन करता। ललित बाबू की कृपा से हल चलाने का ज्ञान ब्राह्मण को मिला। मूलनिवासी से इतना घृणा भड़कानेवाला जरा सोचें मंदिर और क्रियाक्रम में ये दक्षिणा कहा से आता है। प्रजा नहीं तो राजा कौन? सभी मिनिस्टर ,नेता ,पदाधिकारी की जनता और सेवक कौन? दिमाग की बत्ती जलाने की जरूरत है। मूलनिवासी से जो कुछ मनुवादी घृणा करते हैं,कमाई की जरिया भी उन्ही से है। जिससे राजा जैसे जीवन जीता है ।उसी से भेद भाव करता है। बिहार में एक महापुरुष लालू जी की सरकार समय से कुछ राहत मूलनिवासी बहुजन को मिला ,बैठने और बोलने की। संविधान तो अधिकार दिया लेकिन अनुपालन लालू जी कुछ अंश दिलाया, बाकी अप्राप्त है। कृतघ्न मूलनिवासी भी कृतज्ञता से विलग है। मुस्लिम जनता से मनुवादी का जीविका नहीं चलता है। इसलिए हिन्दू राष्ट्र और संविधान बदलने की बात होती है। फिर इतनी गाय भैंस मय देश में इस जानवर का क्या होगा। कोई सूगर तो कोई गाय भैंस एवं मछली कोई सियार खिखीर, बिजी खाकर पृथ्वी का संतुलन बनाने का काम करता है। फिर भी एक दूसरे से घृणा करते हैं । भारत अनेकता में एकता का देश है। जिसे कुछ मनुवादी विचार वाले भंग करने पर लगी है। जबकि ये संविधान के विरोध आचरण और विचार है। जो संविधान के लिए खतरे की घंटी है। जिससे सभी वर्ग जो अम्बेडकर वादी है चिन्तित है। हर जाति में मनुवादी और आम्बेडकरवादी है। मनुवादी की संख्या दलित एवं मूलनिवासी में भी कम नहीं है, जो दलित जनता नेता अफसर बन गया है संविधान की कृपा से। महिला जो संविधान की कृपा से पुरुष से आगे हो गई है कृतघ्न ये सब भी है। जिस देश में न्यायपालिका खतरे में हो, अन्य जनता के बारे में सोचने की ही क्या बात है। यदि समय पर सरकार और सभी बुद्धिजीवियों उस पर चिंतन करना बंद कर देगा, तो सभी वर्गों के अकल्याण ही होगा। आजादी मिली अपना अपना अधिकार और कर्तव्य का अनुपालन सभी मानव करने लगे तो फिर भारत सोने की चिड़ियां कहलाने लगेगा। विशेष स्वार्थ को त्यागना होगा । जाति पात भेदभाव को त्यागना होगा। मानव मानव एक समान की विचारधारा को अपनाना होगा। ज़हरीले शब्द पर लगाम लगाने की दिशा में सरकार को अमल करनी होगी। इसके बाद ही प्रजातंत्र सुरक्षित रहेगा। देश के नेताओं का व्यवहार और वाणी में ही यदि जहर मिला हो तो आम जनता पर अंकुश कौन लगाएगा। राज पाट छोड़ कर बुद्ध और सम्राट अशोक सामान्य जीवन जीने लगा। आज अफसर और संन्यासी राज भोग भोगने के लिए जा रहा है। सब जानते हैं मरने के बाद सब परा रह जाता है, अकेले कर्म लेकर जाते हैं। सभी मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति का नाम नहीं जनता जानता । लेकिन पेरियार, फूले,विनोबा, गांधी, लोहिया, पटेल एवं अम्बेडकर को दुनिया इज्जत से नाम लेता है। निष्पक्ष जो अपना पद का निर्वहन करेगा, दुनिया उसे याद करेगा। प्रधानमंत्री हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई सभी अनुयाई के है । सभी को एक नजरिया से देखने की जरूरत है। हर मजहबी को जात पात से उपर उठकर विद्वान निष्कलंक, लायक और दयानतदार नेता को चयन कर देश की प्रजातंत्र में मजबूती देने की दिशा में काम करने की जरूरत है। सांथू की जहरीली आवाज को बंद करना होगा। संविधान अम्बेडकर जी कुछ लोगों के मुताबिक नहीं बनाया, बी एन राव ही बनाया जो आपके वर्ग के ही थे। ये सब अधिकार सभी वर्गों को दिया। फिर उसी खानदान के आप मानते क्यों नहीं।
जागेश्वर मोची मधुबनी संवाददाता।

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