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कोरोना काल में हो रही शादियों का औचित्य

कोरोना आपदा ने लगभग सभी के जीवन में कुछ परिवर्तन लाया है,इस आपदा ने इतना जीवन लील लिया इतने घर तबाह किया कि इसका आकलन करना असम्भव है।
      लाख बुराइयां होने के बाद भी कोरोना ने समाज में कुछ सकारात्मक परिवर्तन भी लाए हैं,अब आप चकित हो जायेंगे कि बुराइयों के राक्षस ने क्या कर डाला ।
     तो चलिए बताते हैं आपको को कोरोना आने के बाद समाज में क्या क्या सकारात्मक परिवर्तन हुए।
     पहला परिवर्तन तो ये हुआ कि लोग व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दे रहे हैं और अपने अगल बगल भी सफाई पर ध्यान दे रहे हैं।
        दूसरा जो सकारात्मक परिवर्तन है वो है कम लोग और कम खर्च में हो रही शादियां।इस समय 10 लोगों में शादियां संभव है जिसकी कल्पना भी कोरोना आपदा से पहले लोग नहीं कर सकते थे,यदि समाज को ये शादियां अच्छी लग गई तो लड़की और लड़के दोनो पक्ष पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार बहुत कम हो जायेगा।
       विद्वानों की माने तो पुराणों में भी ऐसी ही शादियों का जिक्र है,अर्जुन ने द्रोपदी के साथ स्वंयवर किया था तो भी उनके साथ मात्र 5 से 6 लोग ही थे,मर्यादा पुरुषोत्तम राम संग जानकी माता का विवाह भी इसी तरह का एक उदाहरण है।
    यदि समाज ने इस तरह की शादियों को अपना लिया तो बहुत से बेटियों के पिता कर्ज से मुक्त रहेंगे और बेटियों का विवाह उनके लिए कोई अतिरिक्त बोझ साबित नही होगा।

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