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नशे के विरूद्ध. .वन मैन आर्मी. ..ओपी शर्मा के अथक प्रयास. ..समाज में जगी आस..

हिमाचल के युवाओं और अविभावकों के लिए उम्मीद की किरण….ओ.पी.शर्मा.

हिमाचल प्रदेश जैसे शांतिप्रिय और देवभूमि में वर्तमान दौर में नशे का सेवन, उसकी उपलब्धता और युवाओं में निरंतर फैलता यह जहर आज अविभावकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है.यह हमारे समाज, व्यवस्था और संबंधित जिम्मेवार लोगों के लिये गंभीर चिंतन का विषय और आत्मचिंतन का विषय बन चुका है.और इसके कारण और निवारण पर सभी आंखे मूंदे हुए हैं.


आज के युग में जब समाज नशे की अंधेरी खाई की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने जीवन का ध्येय समाज को इस विनाशकारी लहर से बचाना बना चुके हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं श्री ओ. पी. शर्मा, जो हिमाचल प्रदेश में नशा निवारण की दिशा में उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। पूर्व नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारी के रूप में उन्होंने वर्षों तक मादक पदार्थों की रोकथाम और नियंत्रण के क्षेत्र में अनुभव अर्जित किया, और अब उसी अनुभव को समाज कल्याण के कार्यों में समर्पित कर दिया है।


श्री ओ. पी. शर्मा का मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून और दंड से नहीं, बल्कि जागरूकता और शिक्षा से समाप्त की जा सकती है। इसी सोच के साथ वे हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के संयोजक और मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। अपने अनुभव और दूरदृiiष्टि के आधार पर उन्होंने एक व्यावहारिक कार्यनीति तैयार की है, जिसके अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है।

वे केवल बैठकों और रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर लोगों से संवाद करते हैं। वे विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करते हैं। उनके व्याख्यान केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। उनके शब्दों में संवेदना, अनुभव और समाजसेवा का भाव झलकता है जो भावी पीढ़ी के लिये प्रेरणा स्त्रोत है.



ओ. पी. शर्मा जी का कहना है कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। यदि यह शक्ति भटक जाए, तो समाज का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए वे युवाओं के बीच जाकर उन्हें यह समझाते हैं कि नशा पल भर का आनंद और जीवन भर की बर्बादी है। वे वास्तविक उदाहरणों और आंकड़ों के माध्यम से बताते हैं कि कैसे नशे की लत एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है।

उनकी कार्यशैली में विशेषता यह है कि वे आलोचना नहीं, संवाद पर विश्वास करते हैं। वे युवाओं को दुत्कारने की बजाय उनके भीतर की ऊर्जा को सही दिशा देने का प्रयास करते हैं। उनके कार्यक्रमों में अक्सर “जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और आत्मनियंत्रण” पर विशेष जोर रहता है।


नशा मुक्त समाज के निर्माण में अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओ. पी. शर्मा जी इस पहलू को भलीभांति समझते हैं। वे माता-पिता को यह समझाते हैं कि बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालने, संवाद की कमी और सामाजिक दूरी जैसी बातें अक्सर युवाओं को नशे की ओर धकेल देती हैं।

वे अभिभावकों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अपने बच्चों के मित्र बनें, उनके जीवन की समस्याओं को समझें और उन्हें प्यार, विश्वास और दिशा दें। शर्मा जी का कहना है कि “परिवार ही पहला विद्यालय है, और माता-पिता सबसे पहले शिक्षक।” इस भावना के साथ वे परिवारों में संवाद और सहयोग की संस्कृति विकसित करने का संदेश देते हैं।


ओ. पी. शर्मा जी को सही मायने में “वन मैन आर्मी” कहा जा सकता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से हजारों युवाओं और परिवारों तक यह संदेश पहुँचाया है कि नशा कोई समाधान नहीं, बल्कि समस्या की जड़ है। उनका जीवन स्वयं एक उदाहरण है कि दृढ़ निश्चय और ईमानदारी से किया गया प्रयास समाज को बदल सकता है।

वे किसी सरकारी समर्थन या प्रचार की परवाह किए बिना अपने मिशन पर कार्यरत हैं। अपने संसाधनों, अनुभव और जुनून के बल पर वे गाँव-गाँव, स्कूल-स्कूल जाकर नशा उन्मूलन के बीज बो रहे हैं

उनके प्रयासों से आज हिमाचल प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थानों में नशा विरोधी क्लब स्थापित हो चुके हैं। छात्र स्वयंसेवक बनकर अपने साथियों को जागरूक कर रहे हैं। अभिभावक बैठकों में नशे के खिलाफ चर्चा शुरू हो चुकी है। सबसे बड़ी बात, समाज में यह विश्वास जागा है कि बदलाव संभव है — यदि कोई आगे बढ़कर नेतृत्व करे

श्री ओ. पी. शर्मा का जीवन और कार्य हमें यह सिखाता है कि एक व्यक्ति भी समाज परिवर्तन की बड़ी लहर का कारण बन सकता है। वे केवल नशा निवारण के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि नवयुग के पथप्रदर्शक हैं। युवाओं में जागरूकता, अभिभावकों में जिम्मेदारी और समाज में सामूहिक चेतना का जो संचार उन्होंने किया है, वह आने वाले वर्षों में हिमाचल ही नहीं, पूरे भारत के लिए प्रेरणा बनेगा।
ओ पी शर्मा के प्रयासों, अनुभव और व्यवहारिक कार्यनीति को सामाजिक संस्थाओं, स्वंयसेवी संस्थाओं और सरकार को धरातल पर कार्यान्वयन करने की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता दिखानी होगी, तभी हमारी भावी पीढ़ी का वर्तमान और भविष्य सुनहरा बन सकता है और हमारी युवा पीढ़ी इस घोर अंधकार से बचकर जीवन के उजियारे की दिशा में आगे बढ़ सकती है.


विक्रम वर्मा
स्वतंत्र लेखक चम्बा
हिमाचल प्रदेश

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