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गायकी से विधायकी तक :मैथिली ठाकुर

मैथिली ठाकुर की गायक से विधायक बनने की यात्रा बेहद प्रेरणादायक और संघर्ष से भरी रही है। बचपन से संगीत में पारंगत मैथिली ने लोक गायन की दुनिया में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं और वर्षों तक अपनी आवाज और सांस्कृतिक योगदान से लाखों लोगों का दिल जीता। अब वे बिहार की सबसे युवा विधायक बनकर समाजसेवा की नई राह पर अग्रसर हुई हैं।

मैथिली का जन्म बिहार के मधुबनी जिले में संगीतप्रेमी परिवार में हुआ। उनके पिता और दादा दोनों शास्त्रीय संगीत और लोक-संगीत सिखाते थे। चार साल की उम्र से ही उन्होंने भारतीय लोक संगीत और भक्ति गीतों की शिक्षा लेना शुरू कर दी थी।परिवार दिल्ली शिफ्ट हुआ ताकि मैथिली को संगीत के बेहतर मौके मिलें। दस साल की उम्र से वे जागरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, और स्टेज पर प्रस्तुति देने लगीं।2011 में 'सारेगामापा लिटिल चैंप्स' और बाद में 'इंडियन आइडल जूनियर' जैसे रियलिटी शोज़ में हिस्सा लिया, जिससे उन्हें देशभर में पहचान मिली। 2017 में 'राइजिंग स्टार' में रनरअप रहीं। सोशल मीडिया पर उनके भक्ति और लोक गीत बेहद लोकप्रिय हुए, जिससे लाखों फॉलोअर्स बने। भाई आयाची और ऋषभ के साथ फोक और भक्ति संगीत को प्रोत्साहन देने के लिए सैकड़ों रिकॉर्डिंग कीं; रामचरितमानस, मैथिली लोकगीत आदि से उनकी पहचान सशक्त हुई।

बिहार के मधुबनी जिले की लोक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के प्रयास में 2019 में उन्हें भाइयों के साथ मधुबनी का ब्रांड ऐम्बेसडर चुना गया। मैथिली ठाकुर ने साफ तौर पर कहा है कि "गायकी फर्स्ट, पॉलिटिक्स सेकंडरी"। राजनीति में प्रवेश के बावजूद वे संगीत को कभी नहीं छोड़ेंगी। साथ ही, बिहार की सेवा की भावना से उन्होंने 2025 में बीजेपी ज्वॉइन की और अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा।

25 वर्ष की उम्र में अलीनगर सीट से बड़ी विजय प्राप्त कर वे बिहार की सबसे युवा विधायक बन गईं। उन्होंने 11,730 वोटों से जीत दर्ज की। चुनाव प्रचार के दौरान उनकी गायन प्रतिभा और सादगी ने लोगों का दिल जीता ।चुनावी मंच पर भी उन्होंने स्थानीय भाषाओं में संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं; यह उनके चुनावी अभियान की विशेषता रही। जीत के बाद उन्होंने कहा कि लोक-कल्याण और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देगीं और संगीत को कभी नहीं छोड़ेंगी।

मैथिली ठाकुर की यात्रा एक उदाहरण है कि कला के क्षेत्र की उपलब्धियां यदि समाजसेवा की प्रेरणा बन जाएं, तो सामाजिक व राजनीतिक बदलाव भी लाना संभव है। उनकी संघर्षशीलता व समर्पण युक्त यात्रा युवा पीढ़ी को प्रेरित करती है। गायक से विधायक बनने की यह कहानी बिहार की सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का नया अध्याय है।
पुरुषोत्तम झा
पटना

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Comment
  • Manish Kumar

    सुन्दर लेख