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विभिन्न रोगों के लिए रामवाण दवा है हल्दी : डॉ नीरज


खोदावंदपुर/बेगूसराय। हल्दी विभिन्न रोगों के लिए रामवाण दवा है.यह सर्वसुलभ है.इसके नियमित सेवन से कई असाध्य रोग जड़ से समाप्त हो जाते हैं।

यह जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र खोदावंदपुर के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ नीरज कुमार ने दी। बेगूसराय एवं समस्तीपुर जिला के 27 किसानों को वर्चुअल प्रशिक्षण देते हुए उन्होंने बताया कि हल्दी इन्फ्लेमेटरी है।.यह हृदयरोग, मधुमेह, को नियंत्रण करता है।यह कैंसर को रोक सकता है। हल्दी ओस्टियो आर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है. यह मानव शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाता है। हल्दी एंटी एजिंग सप्लीमेंट के रूप में काम कर सकता है।
हल्दी के प्रकार-
हल्दी के उन्नत किस्मों में राजेंद्र सोनिया, राजेंद्र सोनाली प्रमुख है। राजेंद्र सोनिया की उपाधि क्षमता 400 से 450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जबकि राजेंद्र सोनाली की उपज क्षमता 500 से 550 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है।
उत्पादन तकनीक-
हल्दी बलुई दोमट या हल्की दोमट मिट्टी के लिए उपयुक्त है। 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से बीज की लागत आती है. इसकी रोपाई का समय 15 से 30 मई है बीज को 30 गुने 20 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपना चाहिए। इसकी खेती के लिए गोबर की सड़ी खाद्य 30 टन प्रति हेक्टेयर नेत्रजन 100 से 150 किलोग्राम, स्फुर 60 किलोग्राम, पोटाश 100-120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर देना चाहिए.उन्होंने बताया कि हल्दी अंतर्वती खेती के लिए उपयुक्त है. इससे अरहर, ओल, आम, लीची व मक्का के साथ उपजाया जा सकता है.हल्दी फसल में होने वाले रोग से बचाव के लिए 2.5 ग्राम मनकोजेब, 1 ग्राम कारमेडाजिम प्रति लीटर पानी के घोलकर फिर छिड़काव किया जाना चाहिए।

व्यवसायिक हल्दी उत्पादन तकनीक पर वर्चुअल प्रशिक्षण देते वैज्ञानिक डॉ नीरज व मौजूद किसान

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