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शुद्ध भोजन अपनाओ मिलावटखोरी को मात दो!*


आज के समय मे हमारे खाने में मिलावट इतनी बढ़ गई है कि दूध, दही, पनीर, घी–तेल से लेकर मिठाई और फास्ट–फूड तक कुछ भी पूरी तरह भरोसे लायक नहीं रहा। स्वाद, रंग और खुशबू दिखाने के नाम पर ऐसे रसायन और नकली चीज़ें मिलाई जा रही हैं, जो शरीर को धीरे–धीरे बीमार बना देती हैं।हालत यह है कि हम रोज़ अखबारों और सोशल मीडिया पर मिलावटखोरी की खबरें पढ़ते हैं, छापे और सैंपल फेल होने की बातें देखते हैं—लेकिन फिर भी हम उसे इग्नोर कर देते हैं, जैसे यह खतरा हमारे घर तक पहुँच ही नहीं सकता। हाल ही में राजस्थान स्कूल के ट्रस्टी और जीतो के कोषाध्यक्ष अशोकजी बाफना और स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका के साथ हुई बातचीत का मुख्य विषय भी यही था कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारी युवा पीढ़ी उठा रही है, जो जल्दी,आसानी और लुभावने रिल्स व ट्रैंडिंग के चक्कर में बाहर का खाना ज़्यादा खा रही है। गैस, एसिडिटी, कमजोरी, मोटापा, स्किन की दिक्कतें, बार–बार बीमार पड़ना—यह सब अब युवाओं में आम हो चुका है, और कम उम्र में ही डायबिटीज–बीपी जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। यह बात साफ समझ आई कि समस्या सिर्फ मिलावट करने वालों की नहीं, बल्कि हमारी खुद की आदतों की भी है—पहले मिठाई, स्नैक्स और कई चीजें घर में बनती थीं; आज सब बाहर से खरीदने की आदत पड़ गई है। अब समय है कि हम जागरूक बनें, अपने परिवार और बच्चों को शुद्ध खाने की आदत सिखाएँ और जहाँ तक हो सके घर का ही खाना अपनाएँ। सस्ता देखकर खुश होने के बजाय शुद्ध देखकर संतोष पाना सबसे जरूरी है, क्योंकि खाना अगर शुद्ध होगा, तभी युवाओं का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ होगा।

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