**भिवंडी में ‘मेट्रो’ के नाम पर प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई!
3 दिनों में कई घर ढहाए, लोगों को न नोटिस मिला, न मुआवज़ा**
भिवंडी, 17–19 नवंबर:
भिवंडी में बीते तीन दिनों से प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे कथित “मेट्रो विकास अभियान” ने स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश और बेचैनी पैदा कर दी है। शहर के कई इलाकों में लोगों के मकानों को अचानक तोड़ दिया गया, जिसमें प्रभावित परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई बिना उचित नोटिस, बिना पर्याप्त समय, और बिना किसी मुआवज़े के की गई।
लोगों का आरोप — सिर्फ 24 घंटे का नोटिस!
कई प्रभावित परिवारों के मुताबिक उन्हें नोटिस बेहद देर से मिला, और कुछ को तो तोड़फोड़ से ठीक 24 घंटे पहले ही सूचना दी गई।
लोगों ने बताया कि
न उनके पास अपील का समय था
न मकान खाली करने की उचित अवधि
न वैकल्पिक व्यवस्था
और न ही मुआवज़े की कोई जानकारी
रातों-रात घर उजड़ गए
स्थानीय निवासियों के मुताबिक प्रशासनिक टीमों ने जेसीबी लेकर पहुंचकर बिना कोई स्पष्ट सुनवाई किए मकान ढहा दिए।
कई लोग अपने जरूरी कागज़ात और सामान भी नहीं बचा पाए।
मेट्रो परियोजना या अन्य मकसद? उठने लगे सवाल
लोगों का कहना है कि
“मेट्रो” का नाम लेकर तोड़फोड़ की जा रही है
लेकिन जमीन किस उद्देश्य से ली जा रही है, इसका कोई पारदर्शी खुलासा नहीं किया गया है
इस कारण लोगों के मन में प्रशासन की नीयत को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
**प्रभावित परिवारों की मांग—
न्याय, मुआवज़ा और पारदर्शिता**
प्रभावितों ने राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों से अपील की है कि:
1. अवैध व जल्दबाज़ी में की गई तोड़फोड़ की जांच हो
2. बिना उचित नोटिस की गई कार्रवाई पर रोक लगे
3. सभी परिवारों को उचित मुआवज़ा और पुनर्वास मिले
4. प्रशासन अपनी योजना और प्रक्रिया पारदर्शी करे