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Jeevan yuddh hai aaram nahi.

जीवन युद्ध है आराम नहीं",
हमारा जीवन युद्ध की तरह है, जिसमें आराम नहीं है। यह बिलकुल सत्य है, जीवन दे सुख-दुःख उतर चढ़ाव चले रहते है। यही तो जीवन है, जिससे हम बहुत कुछ सीखते है और बहुत सारी परेशानियाँ आती है जिनसे सिख कर हमें आगे बढ़ना होता है।
जीवन में सुख-दुखों के ताने-बाने से बनता है। जीवन में सुख-दुख धूप-छांव की तरह आते जाते हैं। ये सुख-दुख मनुष्य को संघर्षों से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। मनुष्य के जीवन में संघर्ष परम आवश्यक है। एक मनुष्य तभी मनुष्य कहलाता है, जब वह संघर्षों से विजय पा लेता है। इस संसार में ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं है जिसने संघर्ष नहीं किया हो। यह अवश्य है किसी के जीवन में कम और किसी के ज्यादा जीवन में संघर्ष ज्यादा होते हैं परन्तु होते अवश्य है। संघर्षों भी जीवन में विभिन्न तरह के होते हैं परन्तु होते अवश्य हैं। जीवन में हमें कभी हारना नहीं चाहिए हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। मनुष्य को जीवन में कभी भी कोई आराम नहीं है, न ही उसकी इच्छाओं पर कभी काबू नहीं पा सकता। कभी उसे यह चहिए कभी कुछ, उसकी जरूरतें कभी खत्म नहीं होती।

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