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सड़क निर्माण में सौतेला व्यवहार: एक पक्ष तेज रफ्तार विकास, दूसरा पक्ष उपेक्षा का शिकार

देश की सड़कें केवल यातायात का माध्यम भर नहीं होतीं—यह किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विकास की धुरी होती हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि भारत में अब भी सड़क निर्माण और मरम्मत के कामों में क्षेत्रीय असंतुलन और सौतेला व्यवहार साफ-साफ दिखता है। बात यदि दक्षिण गुजरात और बिहार के बक्सर-आरा क्षेत्र की तुलना की जाए, तो यह असमानता और भी अधिक स्पष्ट हो जाती है।
दक्षिण गुजरात: तेज रफ्तार विकास की मिसाल
हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का दक्षिण गुजरात में लगातार कई चरणों में दौरा चर्चा का बड़ा विषय बना।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की स्वयं जाँच,
तेज रफ्तार से निर्माण,
पलसाना में अंडरपास की तुरंत स्वीकृति,
और हर छोटे-बड़े मुद्दे की मौके पर समीक्षा
इन सबने वहां के लोगों को यह भरोसा दिलाया है कि सरकार विकास को गति देने के लिए कितनी गंभीर है।
मंत्री का ज़मीनी निरीक्षण, गुणवत्ता पर ज़ोर, और स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान ने दक्षिण गुजरात को एक बड़ी राहत और तेजी से उभरते विकास का मौका दिया है। यह मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।
NH-922 बक्सर-आरा रोड: उपेक्षा और लापरवाही की कहानी
दूसरी तरफ, बिहार के बक्सर-आरा NH-922 की स्थिति देखकर यही सवाल उठता है कि आखिर एक ही देश में सड़क निर्माण को लेकर इतना भेदभाव क्यों?

1. असमान, ऊबड़-खाबड़ निर्माण
NH-922 पर निर्माण कार्य कई जगह: असमान है,कहीं ऊँचा-निचा,कहीं कटाव,
जिससे वाहन चालकों के लिए यह सड़क किसी खतरे से कम नहीं।
2. लगातार होती दुर्घटनाएँ
बार-बार होने वाली सड़क दुर्घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सड़क निर्माण या निगरानी में गंभीर कमियां हैं। सड़क की ऊँचाई, मोड़ों का डिज़ाइन, साइड ड्रेनेज की अनुपस्थिति—सभी मिलकर इसे "दुर्घटना संभावित ज़ोन" बनाते हैं।
3. सरकारी निरीक्षण का अभाव
जहाँ दक्षिण गुजरात में मंत्री स्वयं पहुँचकर निरीक्षण करते हैं,
वहीं NH-922 पर:
न तो उच्चस्तरीय निरीक्षण दिखता है,
न गुणवत्ता पर ध्यान,न ही स्थानीय जनता की शिकायतों पर कार्रवाई।
यह सीधे-सीधे सौतेले व्यवहार का प्रतीक है।
आखिर सौतेला व्यवहार क्यों?
यह सवाल कई बार उठता है कि आखिर कुछ क्षेत्रों में विकास की गाड़ी तेज़ चलती है और कुछ जगहों पर वह रेंगती क्यों है?
इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं:
1. राजनीतिक प्राथमिकताएँ
कुछ क्षेत्रों को चुनावी महत्व, राजनीतिक दबदबे या रणनीतिक दृष्टि से अधिक तवज्जो मिलती है—और यही स्थिति अक्सर असंतुलन पैदा करती है।
2. स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता
दक्षिण गुजरात का नेतृत्व सड़क परियोजनाओं को लेकर काफी सक्रिय रहता है। वहीं बक्सर-आरा क्षेत्र में ऐसी आक्रामक पैरवी सामान्यतः नहीं देखी जाती।
3. निगरानी और जवाबदेही की कमी
NH-922 पर निर्माण कार्य की निगरानी या तकनीकी परीक्षण की कोई गंभीर व्यवस्था नहीं दिखती।
जब तक अधिकारी और ठेकेदारों पर कठोर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सड़कें समान गुणवत्ता की नहीं बनेंगी।
4. आर्थिक दृष्टि से वर्गीकरण
कुछ क्षेत्रों को औद्योगिक कॉरिडोर, पर्यटन, और लॉजिस्टिक्स के लिए “उच्च प्राथमिकता” मान लिया जाता है। इससे ग्रामीण या कम विकसित क्षेत्रों की सड़कों की फाइलें वर्षों तक धूल फाँकती रहती हैं।
बक्सर-आरा रोड क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सड़क मात्र एक हाईवे नहीं, बल्कि:
उत्तर बिहार के कई जिलों की लाइफलाइन,
व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य मार्ग,
और वाराणसी-गया-पटना कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यहां खराब सड़क सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि सीधे-सीधे आर्थिक नुकसान, दुर्घटना का खतरा और विकास में बाधा है।
जनता का धैर्य अब टूट रहा है
बक्सर और आसपास के क्षेत्रों के लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासन तक आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं दिख रही।
लोगों में यह भावना गहराती जा रही है कि विकास के नाम पर उनके साथ भेदभाव हो रहा है।
अब क्या होना चाहिए? (सुझाव)

1. केंद्रीय स्तर पर पुनः निरीक्षण
NH-922 पर केंद्रीय मंत्री या उच्चस्तरीय टीम द्वारा सख्त निरीक्षण कराया जाए।
2. गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य
प्रत्येक 10 किमी पर लेयर टेस्टिंग, डामर की गुणवत्ता जाँच और कैमरा-बेस्ड मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो।
3. ठेकेदारों की जवाबदेही
खराब निर्माण पाए जाने पर कंपनी के विरुद्ध:
भारी जुर्माना,
ब्लैकलिस्टिंग,
और पुनर्निर्माण की बाध्यता हो।
4. स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी
इस सड़क की गुणवत्ता को लेकर सांसद और विधायक दोनों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मजबूत पैरवी करनी चाहिए।
5. पूर्णता की समयसीमा तय हो
एक निश्चित समयसीमा में सड़क को पूरा करना अनिवार्य हो—नहीं तो अनुबंध रद्द हो।
दक्षिण गुजरात में तेज़ विकास और NH-922 की उपेक्षा, दोनों की तुलना यह बताती है कि भारत में सड़क निर्माण को लेकर एकरूप नीति और समान प्राथमिकता की बहुत ज़रूरत है।
किसी क्षेत्र का विकास सिर्फ वहां के लोगों का हक नहीं, बल्कि देश की समग्र प्रगति का आधार है।

बिहार के बक्सर-आरा NH-922 जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सौतेला व्यवहार अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सरकार को चाहिए कि वह समान विकास के सिद्धांत पर चलते हुए इस सड़क को भी दक्षिण गुजरात जैसी प्राथमिकता दे—ताकि देश के हर क्षेत्र में विकास की राह सीधी, सुरक्षित और समान हो सके।

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