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अपना घर ने रजनी को पहुंचाया बरेली स्थित उसके घर

दो वर्ष से भी अधिक समय से घर से लापता रजनी मानसिक विमंदित होने के कारण न जाने कैसे भटकती हुई कोटा के समीप मंडाना पहुँच गई। गत वर्ष आठ अगस्त को वहाँ लावारिस अवस्था में एक स्त्री को बहुत दिनों तक इधर उधर भटकते देख वहाँ से अब्दुल कलाम द्वारा अपना घर आश्रम को सूचित किया कि वहाँ पेट्रोल पंप के पास एक महिला है जो अपने विषय में कुछ नहीं बता पा रही है।
सूचना मिलने पर अपना घर की टीम ने वहाँ पहुँच कर उसे अपना घर में आश्रय दिया।अपना घर के चिकित्सकों और सेवासाथियों द्वारा एक वर्ष तक निरंतर इलाज और कॉन्सलिंग के बाद वह अपने परिवार के संबंध में कुछ बताने योग्य हुई और उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश बरेली के टांडा इनायतुल्ला,भौजी पूरा ग्राम की रहने वाली है।अपना घर की टीम द्वारा बड़े प्रयासों से उसके परिजनों से संपर्क कर उनकी रजनी से बात कराई गई तो उन्होंने तुरंत रजनी को पहिचानते हुए बताया कि यह उनकी गुमशुदा बेटी है ।लेकिन परिजनों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे कोटा आकर उसे बरेली ले जा सकें।उनके परिवार में भी कोई अन्य ऐसा सक्षम व्यक्ति नहीं है जो कोटा तक आ सके
कोटा से बरेली के लिए सप्ताह में एकमात्र सीधी रेल गाड़ी होने से भी रजनी को परिवार तक पहुंचाना कुछ कठिन कार्य था। महिला होने के कारण उसे नियमानुसार उसे महिला सेवासाथी के साथ ही भेजा जा सकता था।सीधी ट्रेन में रिजर्वेशन मिलना भी कठिन है,फिर भी अपना घर के की महिला सेवासाथी रूबीना और उमा द्वारा उसे घर तक पहुँचाने की जिम्मेरी ली गई और अंतत: रजनी को उसके घर उत्तर प्रदेश स्थित भौजी पुरा,बरेली तक उससके घर पर माता चमेली देवी और पिता नेत्रपाल को सौप दिया।अपनी माँ से मिलकर रजनी फूट फूट कर रो पड़ी और माँ बेटी मिलन के इस मार्मिक दृश्य को देख आसपास के लोगों की भी आँखें भर आईं।

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