
नई ‘युथ लोनलीनेस स्केल’ युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: डॉ. वीरेन्द्र पाल
कुवि कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने किया नई युथ लोनलीनेस स्केल का विमोचन
कुरुक्षेत्र, 3 दिसम्बर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. आशु धवन ने अपनी विद्यार्थियों अल्का और खुशबू के साथ मिलकर युवाओं में बढ़ती भावनात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई “युथ लोनलीनेस स्केल” तैयार की है। आधुनिक समय में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों में वृद्धि को देखते हुए यह स्केल एक महत्वपूर्ण शोध-आधारित पहल है।
नई युथ लोनलीनेस स्केल का आधिकारिक विमोचन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पाल द्वारा किया गया। उन्होंने इस नवाचार को विश्वविद्यालय के लिए गर्व की उपलब्धि बताते हुए कहा कि आज के समय में युवा वर्ग अनेक सामाजिक व मनोवैज्ञानिक दबावों से गुजर रहा है, ऐसे में इस प्रकार के शोध-आधारित उपकरण उनकी मानसिक स्थिति को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। डॉ. वीरेंद्र पाल ने कहा कि यह स्केल न केवल व्यक्तिगत स्तर पर युवाओं की मदद करेगी बल्कि स्कूलों, कॉलेजों और काउंसलिंग केंद्रों में भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने डॉ. आशु धवन और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह योगदान समाज के व्यापक हित में है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
डॉ. आशु धवन ने बताया कि उनकी टीम को विश्वास है कि यह स्केल युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को समझने और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करने में एक सार्थक और प्रभावी उपकरण की भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि इस स्केल का उद्देश्य युवाओं में अकेलेपन के स्तर का वैज्ञानिक विश्लेषण करना तथा उनकी भावनात्मक व मानसिक स्थिति से जुड़े चिंताओं की शुरुआती पहचान में सहायता करना है। यह उपकरण स्कूल काउंसलरों, मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए प्रभावी साबित होगा। इस महत्वपूर्ण स्केल को कॉन्शस माइंड सॉल्यूशन ने प्रकाशित किया है, जो भारत में प्रतिष्ठित पियर्सन पब्लिकेशन का सहयोगी भागीदार है।
इस अवसर पर मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राज रतन भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस उपलब्धि पर डॉ. आशु धवन और उनकी टीम को हार्दिक बधाई दी और कहा कि यह स्केल न केवल शोधकर्ताओं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी।