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छत्तीसगढ़ के पारंपरिक बांस गीत गाथा सम्मान समारोह में 1000 से अधिक कलाकारों ने किया अद्वितीय प्रदर्शन



बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित "पारंपरिक बांस गीत गाथा सम्मान समारोह" ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की। यह भव्य कार्यक्रम 1000 से अधिक कलाकारों की शानदार प्रस्तुति के साथ लाल बहादुर शास्त्री स्कूल, बिलासपुर में आयोजित किया गया। इस आयोजन में प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और बांस गीत गाथा की समृद्ध परंपरा को सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे माननीय श्री बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला जी, पूर्व महापौर रामशरण यादव जी, और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। समाज के अध्यक्ष पदाधिकारी और गढ़ समाज के लोग भी इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान, कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बांस गीत गाथा की और संगीत से जो एक अद्वितीय छटा बिखेरी, उसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस आयोजन ने न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित किया, बल्कि कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच भी प्रदान किया।

विधायक सुशांत शुक्ला जी ने अपने संबोधन में कहा, "यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हम सभी को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोक कला का सम्मान करना चाहिए। यह समारोह इसी दिशा में एक अहम कदम है।"

पूर्व महापौर रामशरण यादव जी ने भी बांस गीत गाथा की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ की धरोहर है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ी को सिखाना और संरक्षित करना चाहिए।

इस कार्यक्रम ने न केवल छत्तीसगढ़ के पारंपरिक संगीत को बढ़ावा दिया, बल्कि कलाकारों के उत्साह और परिश्रम को भी सम्मानित किया। कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, और इस आयोजन ने सभी के दिलों में अपनी खास जगह बना ली।

साथ ही, नगर निगम और समाज के पदाधिकारियों ने इस तरह के आयोजनों के महत्व पर जोर दिया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता को रेखांकित किया।

यह समारोह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने और उसे समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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