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ओशो अवतरण दिवस

दिनांक: 11 दिसम्बर |

"एस धम्मो सनंतनो"

बुद्ध चर्चा ओशो वार्ता

आयोजक - स्नेहदीप ओशो विजन रिसर्च मित्र

सौजन्य से -स्नेहदीप फाउंडेशन

आयोजन सहयोगी

ओशो अवतरण दिवस पर “एस धम्मो सनंतनो”—चिंतन, समीक्षा और विपश्यना का आयोजन-

ओशो के अवतरण दिवस के अवसर पर स्नेहदीप फाउंडेशन और ओशो विजन रिसर्च मित्रों द्वारा एक विशेष चिंतन-बैठक आयोजित की गई, जिसमें “एस धम्मो सनंतनो” की समीक्षा के साथ बुद्ध चर्चा, ओशो वार्ता और विपश्यना ध्यान का गहन सत्र संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में उपस्थित साधकों ने ओशो की उस मूल शिक्षाओं को दोहराया, जिसमें वे स्पष्ट करते हैं कि—

“सनातन कोई धर्म नहीं, बल्कि एक विज्ञान की समझ है।

सनातन पाखंड से नहीं, होश और ध्यान से जन्म लेता है।”

ओशो विजन के मित्रों ने बुद्ध की करुणा, ध्यान और जागरूकता पर आधारित उस सनातन धारा को समझा, जिसे ओशो ने आधुनिक भाषा में पुनर्जीवित किया है। चर्चा में यह बात विशेष रूप से उभरी कि—

“एक मात्र सनातन है—होशपूर्ण जीवन।

जो व्यक्ति होश में जीता है, वही वासनाओं, पाखंड और भ्रमों से मुक्त होकर वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करता है।”

बैठक में ओशो के वक्तव्यों और बुद्ध के धम्म की तुलना करते हुए बताया गया कि सनातन का अर्थ किसी परंपरा, मत, पंथ या पूजा-पद्धति में नहीं, बल्कि जागरूक, वैज्ञानिक और अनुभवपरक जीवन–दृष्टि में निहित है।

कार्यक्रम के अंत में साधकों ने सामूहिक विपश्यना ध्यान किया, जिसमें ‘देखने वाला ही धर्म है’—इस मूल सूत्र को आत्मसात कराया गया।

स्नेहदीप फाउंडेशन की तरफ से आनंद बोधि ने कहा कि आगामी समय में ऐसे अध्ययन–चिंतन सत्र न केवल जारी रहेंगे बल्कि समाज में होशपूर्ण जीवन की चेतना को आगे बढ़ाने का सतत प्रयास भी होगा।

संस्थापक- "आनंद बोधि "

संयोजक - "विवेक तीर्थंकर "

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