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होलकर विज्ञान महाविद्यालय में इंटर्नशिप प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल


JCS छात्र संगठन ने उच्च-स्तरीय जांच की मांग उठाई**

इंदौर के प्रतिष्ठित होलकर विज्ञान महाविद्यालय में संचालित इंटर्नशिप प्रक्रिया को लेकर व्यापक अनियमितताओं, अवैध वसूली और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जयस छात्र संगठन (JCS) ने इन मुद्दों को लेकर प्राचार्य को ज्ञापन सौंपते हुए 48 घंटे के भीतर लिखित जवाब देने की मांग की है।

छात्र संगठन के अनुसार मुख्य आरोप

JCS द्वारा दिए गए ज्ञापन में इंटर्नशिप प्रक्रिया से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया है—

1. बिना निविदा प्रक्रिया निजी कंपनी से MOU

छात्र संगठन का आरोप है कि किसी भी टेंडर या पारदर्शी प्रक्रिया के बिना महाविद्यालय ने एक निजी कंपनी के साथ MOU किया। कई छात्रों का कहना है कि उनसे “रसीद नहीं लाओगे तो मार्क्स नहीं मिलेंगे” जैसी बात कही जा रही है।

2. शासकीय भवन का निजी संस्था को उपयोग हेतु उपलब्ध कराना

एपीजे अब्दुल कलाम भवन को निजी कंपनी को दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि इससे महाविद्यालय को कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ, जिससे अनियमितता की आशंका गहराती है।

3. इंटर्नशिप से नियमित कक्षाएँ प्रभावित

छात्रों की शिकायत है कि इंटर्नशिप के कारण नियमित कक्षाएँ बाधित हुईं, जिससे उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

4. ₹1000–₹1500 की अवैध वसूली का आरोप

कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि इंटर्नशिप के नाम पर उनसे 1000 से 500 रुपये तक वसूले गए, जबकि सरकारी कॉलेजों में ऐसी कोई फीस निर्धारित नहीं होती।

5. इंटर्नशिप फाइलों की बदइंतजामी

कुछ छात्रों की फाइलें फ़र्श पर पड़ी हुई मिलीं, जिसे गंभीर रिकॉर्ड–प्रबंधन लापरवाही बताया गया।

6. भारी राशि एकत्र होने का आरोप

छात्र संगठन ने दावा किया कि फीस वसूली के आधार पर बड़ी मात्रा में राशि एकत्र की गई, जिसका कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

7. छात्रों को डराने–धमकाने की शिकायत

फीस का विरोध करने वाले छात्रों ने धमकी मिलने की शिकायत की है।

8. JCS पदाधिकारियों को धमकियाँ मिलने का दावा

संगठन ने आरोप लगाया कि इंटर्नशिप से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा उनके पदाधिकारियों को धमकाया गया।

9. इंटर्नशिप कंपनी से जुड़े व्यक्ति पर गंभीर आरोप

JCS का कहना है कि जिस व्यक्ति की कंपनी को इंटर्नशिप का काम सौंपा गया, उसके विरुद्ध पूर्व में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप रहे हैं। संगठन ने सवाल उठाया है कि ऐसे व्यक्ति को कॉलेज परिसर में गतिविधियाँ चलाने की अनुमति कैसे दी गई।

प्रशासन पर टालमटोल का आरोप

JCS ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो—

प्राचार्य अनामिका जैन बैठक का हवाला देते हुए छात्रों से नहीं मिलीं,

प्रशासनिक अधिकारी नागेश डगांवकर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने से बचते रहे,
जिससे छात्रों में आक्रोश बढ़ा।

संगठन ने दावा किया कि “प्रशासन निजी कंपनी के पक्ष में खड़ा दिख रहा है।”

JCS की मुख्य माँगें

1. पूरे मामले की उच्च-स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच।
2. कॉलेज प्रशासन व संबंधित निजी कंपनी के विरुद्ध FIR दर्ज।
3. छात्रों से वसूली गई समस्त राशि की तत्काल वापसी।
4. दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई।
5. छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता।

JCS की चेतावनी

संगठन ने कहा कि यदि 48 घंटे में जवाब नहीं मिला तो वे वैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन शुरू करेंगे।

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