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10 करोड़ के साइबर फ्रॉड और सट्टा नेटवर्क पर पुलिस का 'डिजिटल स्ट्राइक': पानी की बोतलें दिखाकर खोली फर्जी फर्म, 3 और गिरफ्तार

अब तक 9 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में; सेविंग अकाउंट के 10 हजार और करंट अकाउंट के 26 हजार रुपए रेट फिक्स थे।

बैतूल। बैतूल पुलिस ने जिले के इतिहास के अब तक के सबसे बड़े संगठित साइबर ठगी और अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क की जड़ों पर प्रहार किया है। पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी के निर्देशन में चल रही इस हाई-प्रोफाइल जांच में रविवार (14 दिसंबर) को एक और बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने गिरोह की 'रीढ़ की हड्डी' कहे जाने वाले 3 नए मास्टरमाइंड्स को गिरफ्तार किया है।

इस कार्रवाई के साथ ही पुलिस ने फर्जी फर्मों, म्यूल खातों (Mule Accounts) और अवैध सिम कार्ड की उस पूरी चेन का पर्दाफाश कर दिया है, जिसके जरिए करोड़ों रुपयों का काला कारोबार किया जा रहा था। जांच में अब तक 9.84 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेन-देन का खुलासा हो चुका है, जबकि एक ही खाते से मात्र 7 महीने में 10 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन देखकर पुलिस भी हैरान है।

फर्जीवाड़ा ऐसा कि बैंक भी खा गए धोखा: पानी की बोतलों को बताया केमिकल

नवीन गिरफ्तारियों में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कार्यप्रणाली (Modus Operandi) को लेकर हुआ है। आरोपी प्रवीण जयसवाल (खंडवा) और अश्विन धर्मवाल (खंडवा) ने बैंकों की आंखों में धूल झोंकने का नायाब तरीका निकाला था।

पुलिस जांच में सामने आया कि करंट अकाउंट (Current Account) खुलवाने के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी होता है। इसके लिए आरोपियों ने फर्जी दुकानें किराए पर लीं। वहां खाली बोतलों में पानी भरकर उन पर 'खाद्य और केमिकल उत्पादों' के लेबल चस्पा कर दिए। बैंक अधिकारियों को यह असली फर्म लगी और "अश्विन एग्रो" जैसी फर्जी फर्मों के नाम पर करंट अकाउंट खोल दिए गए।

अकेले "अश्विन एग्रो" (खिरकिया, हरदा) के खाते से 10 करोड़ 12 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन ट्रेस किया गया है।

नए गिरफ्तार आरोपियों की 'कुंडली' और भूमिका

अश्विन धर्मवाल (खंडवा): इसने जानबूझकर अपने नाम से फर्जी फर्म "अश्विन एग्रो" पंजीकृत कराई और उसका नियंत्रण सट्टेबाजों को सौंप दिया। पैसों के लालच में इसने 2.70 करोड़ रुपये की राशि अपने खाते से इधर-उधर होने दी।

प्रवीण जयसवाल (खंडवा): यह नेटवर्क का 'अकाउंट मैनेजर' था। इसने खरगोन, खंडवा, हरदा, इंदौर और महाराष्ट्र के जलगांव में करीब 50 लोगों के खाते खुलवाए, जिनमें 20 करंट अकाउंट थे। फर्जी दुकानों का सेटअप तैयार करना इसी का काम था।

पीयूष राठौड़ (बैतूल): यह अवैध सिम का सप्लायर था। यह भोले-भाले ग्राहकों को बातों में उलझाकर दो बार बायोमेट्रिक लगवा लेता था। एक सिम ग्राहक को देता और दूसरी अपने पास रख लेता था, जिसे बाद में साइबर अपराधियों को बेचा जाता था। राजा उर्फ आयुष को इसने 5000 रुपये में सिम बेचे थे।

अकाउंट्स का 'रेट कार्ड' हुआ लीक: कमीशन के लिए बेच रहे थे ईमानदारी

पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने उस 'रेट कार्ड' का भी खुलासा किया है, जिसके तहत लोगों के खाते खरीदे जा रहे थे जिसमें सेविंग अकाउंट (Saving Account): 10,000 रुपये प्रति खाता और चालू खाता (Current Account): 26,500 रुपये प्रति खाता।

आरोपियों को करंट अकाउंट की ज्यादा जरूरत थी क्योंकि इसमें 'डेबिट फ्रीज' की समस्या नहीं होती और ट्रांजैक्शन लिमिट बहुत अधिक होती है।

इस मामले में पुलिस अब तक सिलसिलेवार तरीके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है:

* 20 नवंबर: राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत, नरेंद्र सिंह राजपूत।
* 07 दिसंबर: अमित अग्रवाल (इंदौर)।
* 11 दिसंबर: राजेन्द्र राजपूत, ब्रजेश महाजन।
* 14 दिसंबर: अश्विन धर्मवाल, प्रवीण जयसवाल, पीयूष राठौड़।

पुलिस की चेतावनी: चंद रुपयों के लिए अपराधी न बनें

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि यह सिंडिकेट कमीशन का लालच देकर आम लोगों को फंसा रहा है। पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि "कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम या ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति को देना स्वयं एक अपराध है।" ऐसे खाताधारकों पर भी अब कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

फिलहाल, जप्त मोबाइलों और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है। पुलिस का मानना है कि इस मनी-ट्रेल की जांच से अभी कई और सफेदपोश चेहरों से नकाब उतर सकता है।

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