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आखिर कार 8 साल के लम्बे इंतजार के बाद हथडोली सरपंच स्व शहीद रघुवीर मीणा को मिला न्याय*

*आखिर कार 8 साल के लम्बे इंतजार के बाद हथडोली सरपंच स्व शहीद रघुवीर मीणा को मिला न्याय*

#सरपंच_रघुवीर_मीणा_हत्याकांड_2018

पंचायतीराज चुनाव 2015 में दूसरी बार निर्वाचित ग्राम पंचायत हथडोली सरपंच रघुवीर मीणा जिनकी हत्या 14 फरवरी 2018 की रात को खनन विभाग के ए एम ई प्रकाश माली और आठ आर एसी जवानों और सरपंच पुत्र भैरूलाल मदनलाल भरतलाल और सरपंच पुत्रो के कुछ साथियों की मौजूदगी में अवैध बजरी खनन कर रहे स्थानीय बजरी माफियाओं द्वारा कर दीं गयी थी। हत्याकांड का मुकदमा सरपंच के भाई फैलीराम मीना ने 15 फरवरी 2018 को बौली थाने में दर्ज करवाया था एवं एक रिपोर्ट प्रकाश माली द्वारा भी बौली थाने में दर्ज करवायी गयी थी। हत्याकांड के मुकदमे में आठ नामजद आरोपी थे जिनमें मानसिंह निवासी हथडोली, पुखराज निवासी हथडोली, मनराज निवासी हथडोली, लोकेन्द्रसिंह निवासी हथडोली, चंद्रमोहन निवासी हथडोली, राजेश निवासी हथडोली,सीताराम निवासी हथडोली कमल निवासी सहरावता और अन्य अज्ञात 20-25 आरोपी शामिल थै। जिन्होंने ग्राम हिंदूपुरा चारागाह भूमि में अवैध बजरी स्टोक पर चल रही जैसीबी पर कार्यवाही कै दौरान रात्रि का लाभ उठाकर धोखे से सरपंच रघुवीर मीणा की हत्या कर दी थी। दिनांक 23 फरवरी को हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग को लैकर पुरा बौली उपखण्ड क्षैत्र हत्याकांड के विरोध में बंद रहा। तत्कालीन जांच अधिकारी सम्पत सिंह ने आरोपी मानसिंह के घर से हत्याकांड में उपयोग ली गयी बोलेरो गाड़ी जप्त की जिसमें सरपंच रघुवीर मीणा का मोबाइल पुलिस को प्राप्त हुआ था। 24 फरवरी को हत्याकांड में शामिल आरोपी पुखराज, राजेश, मनराज, लोकेन्द्रसिंह को पुलिस ने गिरफ्तार करके हत्याकांड में उपयोग लिए गये हथियार बरामद किए थै और मौके पर लै जाकर मौका मुआयना किया था। उसके बाद मुल्जिमानो को न्यायालय कै आदेशानुसार न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया था। बाकी आरोपियान को जब पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया तो 6 मार्च 2018 को सरपंच पुत्र भैरूलाल मीना, सरपंच पुत्री इंदरा मीना सरपंच पत्नी धोली देवी, सरपंच के मित्र अन्नत मीना और बाबूलाल रैगर सहित पांच लोग भुख हड़ताल पर जिला कलेक्ट्रेट सवाईमाधोपुर के सामने अपनी मांगों को लैकर बैठ गये थै। इस बिच सवाईमाधोपुर पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन ने कुछ मांगों पर कार्यवाही भी की लैकिन जिसको हत्याकांड का मुख्य आरोपी चश्मदीद गवाह बता रहें थै और सरपंच के परिवारजन जिस मानसिंह को इस‌ हत्याकांड में मुख्य हत्यारा बता रहें थे उसकी और उसके अलावा शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार करनें में असफल रही और आरोपीयों को राजनैतिक संरक्षण और प्रशासन पर राजनैतिक दबाव के चलते धारा 173(8) के तहत पेंडिंग में कर दिया। 13 मार्च 2018 को सवाईमाधोपुर के इंद्रा मेदान पर सरपंच रघुवीर मीणा हत्याकांड के विरोध में लगभग 50000 लोग एकत्रित हुए जिसमें राजनैतिक पार्टियों से जुड़े नेता भी शामिल हुए। डा किरोड़ी लाल मीना, रामकेश मीणा, जिला प्रमुख वंदना मीना, दीपक मीणा जैसे नैताओ ने सरपंच परिवार को आश्वासन दिया और प्रशासनिक अधिकारियों को हत्याकांड के विरोध में एकत्रित हुए लोगों के बिच बुलाकर बाकी आरोपियों को और षड्यंत्रकारियों को गिरफ्तार करने और अन्य मांगों का ज्ञापन दिया। सरपंच पुत्र भैरूलाल मीना के बतायें अनुसार हत्याकांड में शामिल लोग जाति से गुर्जर होने के कारण तत्कालीन सांसद सुखबीर सिंह जोनापुरिया ने हत्यारो को गिरफ्तार नहीं होने दिया और हत्याकांड का मुख्य हत्यारा मानसिंह आज तक गिरफ्तार नहीं हुआ और पुलिस प्रशासन ने मात्र चार लोगों को ही हत्याकांड में गिरफ्तार कर केस को रफा-दफा कर दिया। जबकी किसी व्यक्ति की कोई चार लोग कैसे हत्या कर सकते हैं जबकी घटना स्थल पर उसके साथ आठ आर ए सी के जवान ,एक माइनिंग अधिकारी, सरपंच के तीन पुत्र और उनके साथी साथ मौजूद थे लैकिन षड्यंत्र पूर्वक राजनैतिक दबाव के चलते एक हत्याकांड को पुरी तरह से दबा दिया गया और आज तक भी बाकी हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। सरपंच पुत्र भैरूलाल मीना जो 2018 में हुए ग्राम पंचायत हथडोली के सरपंच पद हेतू हुए उपचुनाव में सरपंच पद पर निर्वाचित हुए और न्याय के लिए हाईकोर्ट जयपुर और सुप्रीम कोर्ट दिल्ली तक लड़े और दो बार हत्याकांड में शामिल हत्यारों की जमानत खारीज करवायी। लैकिन कमजोर जांच और भ्रष्टतंत्र के कारण आज सात साल बाद भी एक निर्वाचित सरपंच का परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और हत्याकांड में शामिल बजरी माफिया धडल्लै से अपना बजरी का अवैध कारोबार निर्विवाद रूप से वर्तमान में चला रहें हैं। जब तीन पीढियां सरपंच रहने के बाद भी एक पद पर रहते हुए सरपंच की हत्या तत्कालीन भाजपा की वसुंधरा राजे की सरकार के समय कर दी गयी और राजनैतिक दबाव के कारण उसको आज दिन तक भी न्याय नहीं मिला तो सोचने वाली बात है आम आदमी न्याय की उम्मीद कैसे कर सकतें हैं।आज भी हत्यारे खुल्ले आम घुम रहें हैं। मतलब किसी की भी हत्या अन्य दो और यदी अपनी जाती का कोई प्रभावशाली राजनेता हो तो आपको डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकी ये हत्यारो को बचाने के लिए तैयार रहते हैं जातिवाद इन जैसे नैताओ के खुन में कुट कुट कर भरा हुआ है। पिछलै पांच सालों में कांग्रेस की सरकार बनी । बामनवास विधानसभा क्षेत्र से इंदिरा मीना को सरपंच पुत्रों ने तन मन धन से सपोर्ट किया और विधायक बनते ही उन्होंने भी क्या किया। उन्ही हत्यारों द्वारा सजायें गये मंच पर जाकर चांदी के मुकूट पहने जिनके खिलाफ कार्यवाही करवाने के लिए सरपंच पुत्र भैरूलाल मीना के पास विधानसभा चुनाव के समय कसमें खायी थी पर विधायक बनते ही सब भुल गयी। राजनेताओं ने अपना अपना वोट काउंट करके एक सरपंच के हत्याकांड को दबाने में हत्यारों को खुल्ला छोड़ दिया और सरपंच के परिवार को तड़पते हुए छोड़ दिया किसी नै कोई मदद नहीं की। जिसका परिणाम यह हुआ किसी हत्यारों ने षड्यंत्र पूर्वक सरपंच के एक पुत्र भैरूलाल पर मानसिंह की हत्या करवाने की सुपारी दैने का मुकदमा गंगापुर थाने में दर्ज करवाया और पुलिस प्रशासन ने बदले की भावना से कार्यवाही करतें हुए षड्यंत्र पूर्वक अपना काम किया लेकिन हत्यारे इस में भी सफल नहीं हो पाये। दूसरे पुत्र मदन पर हत्यारे मानसिंह गुर्जर ने अपने पास काम करने वालै ड्राईवर की बहीन कै साथ बलात्कार करने का मुकदमा दर्ज कराया और खुद गवाह बनकर सरपंच पुत्रों को अपने रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा लैकिन वो भी सफल नहीं हो पाया।और तीसरे पुत्र को भी षड्यंत्र पूर्वक फंसाने के लिए हत्यारों ने पुलिस के साथ मिलकर जाल बिछाया और पुलिस ने इसमें भी हत्यारों की मदद की क्योंकि ये बजरी माफियाओं और पुलिस का गठजोड़ था पर तब तक भैरूलाल मीना इन हत्यारों और षड्यंत्रकारियों से लड लड़कर इतना मजबूत हो गया की इनके हर वार का जवाब देना भली भांति सीख गया और षड्यंत्रकारियों का यह षड्यंत्र भी विफल रहा। सरपंच पुत्र भैरूलाल पर कहीं बार पंचायत गांवों में जाते समय धोखे से वार करने का प्रयास किया पर हर बार इन हत्यारों का वार खाली गया। सरपंच पुत्र मदनलाल भरतलाल ने हत्यारे मानसिंह के बजरी से भरें हुए डम्फर को पुलिस के हवाले किया लैकिन बौली पुलिस थानाधिकारी श्रीकिशन मीना नै षड्यंत्र पूर्वक मदनलाल भरतलाल पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया और फंसाने के इरादें से कार्यवाही की। यहां भी सरपंच पुत्रों ने थानाधिकारी और हत्यारे मानसिंह के खिलाफ मुकदमा कोर्ट के माध्यम से दर्ज करवाकर इनके षड्यंत्र का मुंहतोड़ जवाब दिया।
अब भविष्य में क्या होंगा किसी को पता नहीं है पर आज न्याय तो मिला। हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा मिली। हमें न्यायालय पर भरोसा था और हमेशा रहेगा। हम शांति से न्यायालय के न्याय का इंतजार कर रहे थै। जिसका बाप मरता है दूख उसी को होता है यह कहावत शत प्रतिशत सत्य है और सरपंच के परिवार ने यह सब भोगा है। अभी भी सरपंच परिवार को पूरी आशा है कि हत्यारों को सजा जरूर मिलेगी। सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।

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