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सूरजपुर में बाघ की संदिग्ध मौत, शिकार या तस्करी की आशंका

उदय साहू सरगुजा/ बलरामपुर
मो. न. 9340469048

सूरजपुर (छत्तीसगढ़)। जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत भैसामुंडा सर्किल के रेवटी क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक घटना सामने आई है। जंगल के भीतर एक बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है। शव पर गहरी चोटों के निशान पाए गए हैं, जबकि एक नाखून के गायब होने की भी जानकारी मिली है। घटनास्थल से लोहे का भालेनुमा हथियार मिलने से बाघ के शिकार या अंग-तस्करी की आशंका और प्रबल हो गई है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार बाघ की मौत तीन से चार दिन पहले हो चुकी थी। इतने लंबे समय तक संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र में शव का पड़े रहना वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेवटी क्षेत्र में कैमरा ट्रैप, नियमित पेट्रोलिंग और आधुनिक निगरानी साधनों के इस्तेमाल के दावे किए जाते रहे हैं, इसके बावजूद घटना का देर से सामने आना विभागीय दावों की हकीकत उजागर करता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वन अमले की गतिविधियां काफी सीमित रहती हैं और जंगल में असामाजिक तत्वों का भय कम दिखाई देता है। एक ग्रामीण के अनुसार, कुछ दिन पहले जंगल से संदिग्ध आवाजें सुनाई दी थीं, जिसकी सूचना दी गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में दर्शाई जाने वाली निगरानी और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।

बाघ के शव पर मिले चोट के निशान प्राकृतिक मौत से मेल नहीं खाते। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ को जाल या किसी धारदार हथियार से मारा गया हो सकता है। शव से एक नाखून का गायब होना तस्करी माफिया की ओर इशारा करता है, क्योंकि बाघ के अंगों की अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में भारी कीमत होती है। घटनास्थल से बरामद लोहे का हथियार इस पूरे मामले को और रहस्यमय बनाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर पटेल का कहना है कि इस तरह की घटनाएं प्रायोजित शिकार का संकेत देती हैं। उन्होंने मामले में तत्काल डीएनए टेस्ट और फॉरेंसिक जांच को आवश्यक बताया है, ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।

घटना की सूचना मिलते ही बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडलों के डीएफओ सहित संयुक्त वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वन अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजी

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