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23 साल पुरानी विक्रय रजिस्ट्री की चतुर्दिशा बदलकर भूमि हड़पने की कोशिश पर सिविल कोर्ट की रोक

डिंडौरी में 23 वर्ष पूर्व हुई भूमि विक्रय रजिस्ट्री की चतुर्दिशा बदलकर जमीन हड़पने की कोशिश को सिविल न्यायालय ने रोक दिया है। वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश, डिंडौरी ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी करते हुए संबंधित पक्षों को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा करने से रोक दिया है।

मामला डिंडौरी नगर निवासी सतीश गुप्ता की भूमि खसरा नंबर 130/9/7 से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार सतीश गुप्ता द्वारा अपनी भूमि का विक्रय पत्र 23 वर्ष पूर्व रमेश राजपाल के नाम पर पंजीकृत कराया गया था। आरोप है कि बाद में इस भूमि की चतुर्दिशा में बिना कलेक्टर की अनुमति परिवर्तन कर, प्रार्थना देवी गुप्ता की भूमि को हड़पने का प्रयास किया गया।

बताया गया कि 23 वर्ष पूर्व स्वयं कलेक्टर की अनुमति से विक्रय रजिस्ट्री की चतुर्दिशा ममता सोनी के नाम पर कराई गई थी, लेकिन अब बिना सक्षम अनुमति के चतुर्दिशा बदलकर कब्जे का प्रयास किया जा रहा था।

इस पर प्रार्थना देवी गुप्ता ने वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश, डिंडौरी की अदालत में याचिका दायर कर सतीश गुप्ता, सूर्यकांत गुप्ता, रमेश राजपाल, जगदीश गुप्ता एवं आशीष गुप्ता को जबरन भूमि पर कब्जा करने से रोकने की मांग की थी।

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद 17 दिसंबर 2025 को प्रार्थना देवी गुप्ता के पक्ष में स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के रहते किसी भी प्रकार से राजस्व या बलपूर्वक भूमि पर कब्जा नहीं किया जा सकता।

प्रार्थना देवी गुप्ता ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश न केवल उन्हें, बल्कि अन्य भूमिधारकों को भी संबल प्रदान करेगा, जो ऐसे मामलों से पीड़ित हैं।

गौरतलब है कि प्रार्थना देवी गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. एन. चौहान द्वारा न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई।

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