logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

सुर्खियाँ: राष्ट्रपति आगमन की चकाचौंध में उजड़ती गरीब की दुनिया: क्या चंद घंटों की 'दिखावटी सुंदरता' के लिए पेट पर लात मारना सही है?

जमशेदपुर/आदित्यपुर:
देश की महामहिम राष्ट्रपति का आगमन किसी भी शहर के लिए गर्व का विषय होता है. प्रशासन चुस्त होता है, सड़कें चमकने लगती हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं. लेकिन आदित्यपुर और जमशेदपुर में इस 'वीआईपी मूवमेंट' (VIP Movement) की कीमत समाज का वह तबका चुका रहा है, जो रोज कमाता है और रोज खाता है.
सालों से जमी दुकानों पर चला 'सफाई' अभियान
आदित्यपुर की मुख्य सड़कों के किनारे पिछले कई वर्षों से छोटे-मोटे दुकानदार अपनी दुकानें सजाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ये वही दुकानदार हैं जो हर मौसम की मार झेलकर भी अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं. गौरतलब है कि नगर निगम इन दुकानदारों से बाकायदा 'तहबाजारी' (वेंडर टैक्स/शुल्क) की वसूली करता है. जब टैक्स लिया जाता है, तो उनका वहां होना एक तरह से प्रशासन की मूक सहमति ही है. लेकिन अब, राष्ट्रपति महोदया के आगमन की खबर सुनते ही नगर निगम ने अचानक अपना रंग बदल लिया है और इन दुकानों का सफाया शुरू कर दिया है.

गंदगी पर पर्दा, गरीबों पर डंडा

स्थानीय लोगों और दुकानदारों में इस कार्रवाई को लेकर भारी रोष है. लोगों का कहना है कि शहर के कई अंदरूनी हिस्सों में गंदगी का अंबार लगा है. नालियां बजबजा रही हैं, कचरे का उठाव नियमित नहीं है, जिस पर नगर निगम का ध्यान शायद ही कभी जाता है. लेकिन जैसे ही कोई बड़ा चेहरा शहर में आता है, प्रशासन अपनी नाकामियों और गंदगी को छुपाने के लिए सबसे आसान शिकार यानी 'फुटपाथ दुकानदारों' को निशाना बनाता है.
क्या महामहिम यह चाहेंगी कि उनके स्वागत में गरीबों के आंसू बहे? क्या शहर की सुंदरता केवल मुख्य सड़कों को खाली करा देने से बढ़ जाएगी?
यक्ष प्रश्न: क्या यह न्याय है?

आज यह सवाल पूछना लाजिमी है:

जिस प्रशासन ने सालों से इनसे टैक्स वसूला, वह आज इन्हें अतिक्रमणकारी कैसे मान सकता है?
क्या गरीबों को उजाड़कर दिखाई जाने वाली यह 'नकली सुंदरता' सही है?
क्या प्रशासन को वीआईपी रूट पर सफाई के साथ-साथ इन दुकानदारों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करनी चाहिए थी?

जनता की राय

एक तरफ महामहिम के स्वागत की भव्य तैयारी है, और दूसरी तरफ उजड़ते हुए खोमचे और मायूस चेहरे. यह स्थिति प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है. शहर को साफ रखना जरूरी है, लेकिन सफाई के नाम पर किसी की रोजी-रोटी छीन लेना कहाँ तक उचित है, यह फैसला अब आप जनता को करना है.
आप अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं - क्या प्रशासन का यह रवैया सही है?

81
1557 views

Comment