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RDVV में NSUI का अनोखा प्रदर्शन: कार्यपरिषद बैठक के दौरान उड़ाए गए तोते, कुलगुरु पर गंभीर आरोप

जबलपुर | विशेष रिपोर्ट

जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में शुक्रवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने कुलगुरु के खिलाफ अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।
कार्यपरिषद (Executive Council) की बैठक के दौरान विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने तोतों को उड़ाकर प्रशासन के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराया।

🕊️ प्रतीकात्मक विरोध: “तोते उड़ाकर जताया आक्रोश”
एनएसयूआई का कहना है कि यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय को “अयोग्य नेतृत्व के चंगुल से मुक्त कराने” का प्रतीक है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुलगुरु नियमों और शैक्षणिक मानकों का पालन नहीं कर रहे, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
कार्यपरिषद की बैठक में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को मौके पर मौजूद पुलिस ने रोक दिया। इससे नाराज होकर एनएसयूआई जिलाध्यक्ष सचिन रजक ने बैठक के दौरान तोतों को पिंजरे से निकालकर उड़ा दिया, जिसके बाद परिसर में जमकर नारेबाजी हुई।

🚔 पुलिस मौजूदगी में हुआ प्रदर्शन
घटना के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल तैनात रहा।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मुख्य भवन में ताला लगाकर छात्रों और कार्यकर्ताओं को अंदर जाने से रोका, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
छात्रों का कहना है कि यह कदम उनकी आवाज को दबाने का प्रयास है।

🎓 शैक्षणिक अव्यवस्थाओं के गंभीर आरोप
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें प्रमुख हैं:
विश्वविद्यालय में प्रशासनिक निरंकुशता
छात्र सुविधाओं में लगातार कटौती
प्रशासनिक खर्चों में अनावश्यक वृद्धि
शैक्षणिक गुणवत्ता में गिरावट
संगठन के अनुसार, वर्तमान कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली निरंकुश हो गई है, जिसका सीधा असर छात्रों और संस्थान की साख पर पड़ा है।

💻 तकनीकी पाठ्यक्रम केवल “औपचारिकता”?
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि विधानसभा में तकनीकी पाठ्यक्रमों को लेकर भ्रामक जानकारी दी गई।
जबकि जमीनी हकीकत यह है कि:
बीसीए, एमसीए और बीटेक जैसे पाठ्यक्रमों में
❌ पर्याप्त कंप्यूटर
❌ जरूरी सॉफ्टवेयर
❌ आधुनिक प्रयोगशालाएं
उपलब्ध नहीं हैं।
छात्रों का कहना है कि ऐसे में ये पाठ्यक्रम सिर्फ कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

📉 परीक्षा और परिणाम प्रणाली पर सवाल
विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
एनएसयूआई के अनुसार:
स्वीकृत पदों की तुलना में बहुत कम नियमित प्राध्यापक कार्यरत हैं
परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं हो पा रहीं
परिणाम महीनों तक लंबित रहते हैं
इसका सीधा असर छात्रों के अगले सत्र, प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार पर पड़ रहा है।

⚠️ आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलगुरु और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही छात्र हितों की अनदेखी और प्रशासनिक मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष सचिन रजक, प्रदेश उपाध्यक्ष अमित मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

✍️ निष्कर्ष
RDVV में हुआ यह अनोखा प्रदर्शन न सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि छात्र संगठन अब प्रतीकात्मक और रचनात्मक तरीकों से अपनी आवाज उठाने लगे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है।

📍 रिपोर्ट: सच तक पत्रिका न्यूज़
🖊️ संवाददाता: दीपक विश्वकर्मा, जबलपुर

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