logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

अरावली की रक्षा करो

1️⃣ पहले समझिए पूरा मामला : अरावली केस क्या है?

अरावली पर्वतमाला से जुड़ा मामला कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, जिसका मूल प्रश्न यह रहा है कि “अरावली पहाड़ियाँ आखिर हैं क्या और उन्हें कैसे परिभाषित किया जाए?”

इस मुद्दे पर अलग-अलग राज्यों में अलग परिभाषाएँ लागू थीं, जिससे खनन, निर्माण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भ्रम बना हुआ था।

हालिया सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वैज्ञानिक परिभाषा को स्वीकार किया, जिसके अनुसार—

जिस भू-भाग की ऊँचाई आसपास के सामान्य धरातल से कम से कम 100 मीटर अधिक है, वही अरावली हिल मानी जाएगी।

यदि ऐसी दो या अधिक पहाड़ियाँ 500 मीटर के दायरे में हों, तो उन्हें अरावली रेंज कहा जाएगा।

सरकार का तर्क है कि इससे पूरे देश में एक समान और स्पष्ट परिभाषा लागू होगी।

हालाँकि, इसी बिंदु पर विवाद शुरू होता है, क्योंकि अरावली केवल ऊँचाई नहीं, बल्कि एक पूरा पारिस्थितिक तंत्र है।

2️⃣ अब समझिए नुकसान : राजस्थान को क्या हानि होगी?

उपलब्ध सरकारी और तकनीकी अध्ययनों के अनुसार राजस्थान में मौजूद अरावली पहाड़ियों में से लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियाँ 100 मीटर की ऊँचाई की शर्त पूरी नहीं करतीं।

इसका सीधा अर्थ यह है कि—

👉 राजस्थान की केवल 8–10% पहाड़ियाँ ही “अरावली” की कानूनी परिभाषा में आएँगी
👉 करीब 90% पहाड़ियाँ संरक्षण कानूनों से बाहर हो सकती हैं

यह तथ्य इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि—

अरावली का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में ही स्थित है।

ये छोटी और मध्यम ऊँचाई वाली पहाड़ियाँ ही—

वर्षा जल को रोकती हैं
भूजल पुनर्भरण करती हैं
धूल भरी आँधियों को रोकती हैं
थार रेगिस्तान के फैलाव में बाधा बनती हैं

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि ये पहाड़ियाँ संरक्षण से बाहर हुईं, तो—

अलवर, जयपुर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, उदयपुर, राजसमंद जैसे जिलों में—

🔸भूजल स्तर और गिरेगा
🔸सूखे की तीव्रता बढ़ेगी
🔸खनन और अनियंत्रित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा

राजस्थान पहले ही जल-संकटग्रस्त राज्य है। ऐसे में अरावली का कमजोर होना केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट को जन्म देगा।

3️⃣ अब सवाल समाज से : जनता क्यों जागे?

अब यह समझना ज़रूरी है कि यह लड़ाई केवल अदालत या सरकार की नहीं है— यह लड़ाई समाज की है।

आज यदि अरावली कागज़ों से मिटाई जा रही है, तो कल—

🔹किसान के खेत सूखेंगे
🔹शहरों में पानी महँगा होगा
🔹बच्चों को प्रदूषित हवा विरासत में मिलेगी

सबसे खतरनाक बात यह है कि अरावली का नुकसान वापस सुधरने वाला नहीं है।

एक बार पहाड़ कटे, जलधाराएँ टूटीं और जंगल नष्ट हुए—तो उन्हें वापस लाने में सदियाँ लगती हैं।

इसलिए अब चुप रहना तटस्थता नहीं, भविष्य के खिलाफ खड़ा होना है।

जनता को सवाल पूछने होंगे—

क्या विकास का मतलब प्रकृति को खत्म करना है?
क्या हमारे बच्चों का हक आज के मुनाफे से कम है?

अरावली बचाओ, क्योंकि यह सिर्फ पहाड़ नहीं—जीवनरेखा है।
अगर अरावली बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा।
अगर आज आवाज़ उठी, तभी कल सुरक्षित होगा।

जन-जागरूकता संदेश....🙏

14
150 views

Comment