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Bring Priynka Gandhi to Save Congress.

आज सभ्यता को दरकिनार करते हुए मैं एक बात खुल कर कहना चाहता हूं कि लड़का चाहे कितना ही बड़ा चुतिया क्यों न हो मां बाप उसी को आगे रखते हैं और लड़की चाहे कितनी ही इंटेलीजेंट क्यों न हो उसे चुलहे चौके तक ही महदूद रखा जाता है और अगर लड़की की शादी हो गई हो तो पियहर, ससुराल दोनों मिलकर उसे घर और परिवार में ही जकड़े रहते हैं। ये बात आमजन तक ही महदूद नहीं है बल्कि राजे महाराजे, जागीरदार, और मौजूदा दौर के राजनेताओं पर भी लागू होती है। आज मेरी बहस के केंद्र में राजीव गांधी पुत्री प्रियंका गांधी उर्फ़ वाड्रा है। प्रियंका में वो तमाम खुबियां मोजूद हैं जो उनकी दादी इंदिरा गांधी में थीं। एक बार लालू प्रसाद यादव ने संसद में बहस के दौरान डॉ मनमोहन सिंह से कहा था कि " हुकूमतें गिड़गिड़ाने से नहीं रोब से चलाई जाती हैं" इंदिरा में ये बात थी और प्रियांका में भी है वो संसद में बहस में जब बोलती हैं तो लगता है कि कोई नेत्री बोल रही है। उनके तर्क उनका अंदाज़ सामने वाले को न केवल निरुत्तर कर देता है बल्कि कायल भी करता है। एक बार मेने कांग्रेस नेता राशिद अल्वी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि " कांग्रेस के इस बुरे दौर में आप को नहीं लगता कि प्रियंका को आगे लाना चाहिए" अल्वी साहब ने कहा " प्रियंका गांधी तुरप का पत्ता है अभी वक्त नहीं आया कि इसे खर्च किया जाये" बात ये नहीं थी, बात ये थी कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी और उसे ही गांधी खानदान का असली वारिस मानती थी। इसी चक्कर में गांधी खानदान की राजनीतिक विरासत का बोझ राहुल गांधी के कमज़ोर कन्धों पर डाल दिया गया और उधर प्रियंका के क़दम डगमगा गए और उन्होंने राबर्ट वाड्रा से दिल लगा लिया। अंजाम कार पुत्र मोह में सब गडमड हो गया। राहुल गांधी 12 साल से भाजपा सरकार को हटाने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाये हुए हैं, कभी यात्राएं करते हैं, कभी रेलियां करते हैं कभी विदेश जाकर भाषण देते हैं। संविधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भ्रष्ट होने के सबूत भी लिए बेठे हैं लेकिन सरकार को कैसे हिलाना है ये नहीं जानते। स्थिति 1975 जेसी है जब विपक्ष के कमज़ोर पड़ जाने पर इंदिरा गांधी ने एमरजेंसी लगा दी थी। आज भी विपक्ष पोलियो और लकवा ग्रस्त लग रहा है। इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी हैं। अगर कांग्रेस वाकई चाहती है कि भाजपा सरकार को लगाम डालनी है तो खड़गे को हटा कर प्रियंका को पार्टी की बागडोर संभाल देनी चाहिए और राहुल गांधी को शादी करने की सलाह देकर हनिमून के लिए भेज देना चाहिए वर्ना तानाशाही का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए ये तानाशाही मोदी की हो ज़रूरी नहीं।

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