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वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर ब्रह्मशक्ति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, थाना कलां, सोनीपत द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन

वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर ब्रह्मशक्ति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, थाना कलां, सोनीपत द्वारा हिंदी प्रकोष्ठ, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सहयोग से आयोजित कवि सम्मेलन शुक्रवार को विद्यालय परिसर में अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, शिक्षक, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया। प्राचार्य श्री रामबीर सिंह 'राम' ने सभी अतिथियों का शाब्दिक स्वागत कर गुरु गोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों का प्रसंग सुनाया व क्रांतिकारी लोककवि सांगी दादा निहालचंद 'निहाल' की प्रसिद्ध रचना का गुणगान कर सभी का मन मोहा। श्रीमती सुनीता पीटीआई ने आध्यात्मिक भजन कर्मों का फल सुनाया। दसवीं कक्षा की छात्रा यशिका ने छात्रों को मेहनत के प्रति प्रेरित करती हुई कविता का पाठ किया। 11वीं कक्षा के छात्र हिमांशु ने युवाओं में जोश भरती हुई वीर रस की कविता प्रस्तुत की। दसवीं कक्षा के छात्र मोहित ने पेट्रोयोटिस्म पर इंग्लिश में स्पीच दिया । बारहवीं कक्षा की छात्रा मानसी ने देश भक्ति एवं राष्ट्र निर्माण से ओतप्रोत वीर रस की कविता का पाठ किया। टीजीटी इंग्लिश श्रीमती सुनीता देवी ने शहीदों को समर्पित वीर रस की देशप्रेम से सराबोर रचना सुनाई।

उसके उपरांत कवि सम्मेलन प्रारम्भ हुआ। अपने काव्य पाठ के दौरान आमंत्रित कविगणों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि कृष्ण गोपाल सोलंकी ने जीवन में संघर्ष और आत्मबल का संदेश देते हुए पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं—
“मेहनत और लगन से मुश्किल दिन भी बीता करते हैं,
कुरुक्षेत्र जब मन हो जाये तन को गीता करते हैं,
भूख, गरीबी और अभाव कमजोरी के रूप नहीं,
जो इनको ताकत कर ले वो दुनियां जीता करते हैं।”
उनके बाद दिनेश शर्मा ‘दिनेश’ ने भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रप्रेम को स्वर देते हुए पढ़ा—
“गंगा यमुना सरस्वती से उजियारा परिवेश,
सिंधु कृष्णा कावेरी हैं देती सुख संदेश,
झेलम सरयू तापी करती पोषित हर खलिहान,
गूंजे थल पर गूंजे नभ में जय जय हिंदुस्तान।”

सुप्रसिद्ध हास्य कवि विनीत पांडेय ने जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टि को रेखांकित करते हुए सुनाया—
“फूल बनकर महक जाना जिंदगी है,
गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है।
गम के बादल आएंगे और जाएंगे,
गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है।”

वहीं विख्यात गीतकार चरनजीत चरण ने मानवीय रिश्तों और व्यक्तित्व की महक को इन शब्दों में पिरोया—
“कुछ लोगों की दूरी खुशबू देती है,
कुछ लोगों का पास महकता रहता है,
कुछ लोगों की एक ज़रा सी दस्तक से,
सदियों तक इतिहास महकता रहता है।”

कवियों की इन रचनाओं ने वीर गुरुपुत्रों के बलिदान, राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, आशा और मानवीय मूल्यों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूर्णचंद शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अभिनेता डॉ. रामफल चहल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री संपूर्ण सिंह ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति, संस्कार और हिंदी साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विद्यालय के चेयरमैन श्री ओ. पी. रंगा एवं प्राचार्य श्री रामबीर सिंह 'राम' ने सभी अतिथियों, कविगणों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन विद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर शम्भू दयाल स्कूल खांडा के डायरेक्टर श्री सत्यदेव पाराशर, कल्पना चावला विद्या पीठ के डायरेक्टर श्री धर्मराज खत्री, श्री संजय कुमार,उप प्राचार्य श्री प्रवीन कुमार, शब्दश्री प्रकाशन के प्रॉपराइटर श्री विपेंद्रपाल सिंह, श्याम पेड़ेवाले श्री संजीत कुमार, श्री जीतेन्द्र कुमार, श्री गुलशन कुमार जी सहित अनेक साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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