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ग्रामसभा जयकोट में राशन कार्ड e-KYC की अग्निपरीक्षा: नेटवर्क के लिए जंगलों और चोटियों की खाक छानते सीमांत के ग्रामीण

ग्रामसभा जयकोट में राशन कार्ड e-KYC की अग्निपरीक्षा: नेटवर्क के लिए जंगलों और चोटियों की खाक छानते सीमांत के ग्रामीण
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​धारचूला (पिथौरागढ़): उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की तहसील धारचूला के अंतर्गत सुदूर हिमालयी अंचल की ग्रामसभा जयकोट से आज जो तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं, वे आधुनिक भारत के डिजिटल दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। आज जब पूरा देश 5G सेवाओं और डिजिटल इंडिया की सफलता के जश्न में डूबा है, वहीं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस त्रिकोणी सीमा पर बसे जयकोट गाँव के ग्रामीण एक-एक मोबाइल सिग्नल के लिए तरस रहे हैं।
​प्रशासन द्वारा राशन कार्डों की e-KYC प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके बिना ग्रामीणों को उनके हक का सस्ता राशन मिलना बंद हो सकता है। लेकिन इस तकनीकी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिस नेटवर्क की आवश्यकता है, वह गाँव में पूरी तरह शून्य है। इस विडंबना के कारण ग्रामीणों को विवश होकर कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठंड में मीलों दूर ऊँचे जंगलों और पहाड़ियों की दुर्गम चोटियों पर चढ़ना पड़ रहा है। ग्रामीण उन जगहों की तलाश में भटक रहे हैं जहाँ संयोगवश मोबाइल सिग्नल मिल जाए, ताकि वे अपना बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कर सकें। राशन जैसी बुनियादी जरूरत के लिए पहाड़ के इन प्रहरियों को जिस तरह का शारीरिक श्रम और जोखिम उठाना पड़ रहा है, वह बेहद चिंताजनक है।

​यहाँ की सबसे बड़ी विडंबना सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL की लापरवाही है। क्षेत्र में बीएसएनएल के टावर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन वे महीनों से केवल 'लोहे के ढांचे' और 'सफेद हाथी' बनकर खड़े हैं। टावर होने के बावजूद नेटवर्क का न होना ग्रामीणों के साथ एक क्रूर मजाक जैसा है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि यह भारत, तिब्बत (चीन) और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय त्रिकोणी सीमाओं के मुहाने पर स्थित है। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ संचार व्यवस्था सबसे मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि यहाँ के लोग आज भी संचार विहीन जीवन जीने को मजबूर हैं।

​प्रशासन द्वारा भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन किए बिना ऑनलाइन प्रक्रियाओं को अनिवार्य कर देना और दूसरी ओर बुनियादी संचार सुविधाएं उपलब्ध न कराना, सीमांत की जनता के साथ अन्याय है। यदि इन 'शोपीस' बने टावरों में जल्द नेटवर्क बहाल नहीं किया गया और e-KYC के लिए स्थानीय स्तर पर कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो इन दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानियाँ कम होने के बजाय और बढ़ती चली जाएंगी।

​@PMOIndia @AshwiniVaishnaw Narendra Modi Pushkar Singh Dhami @DMPithoragarh @BSNLCorporate

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