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जमशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने तीन दिवसीय झारखंड दौरे को ऐतिहासिक बनाती जा रही है।

जमशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने तीन दिवसीय झारखंड दौरे को ऐतिहासिक बनाती जा रही है। पहले तो करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में सोमवार को आयोजित 22वें संताली ‘परसी माहा’ एवं ओल चिकी लिपि शताब्दी समारोह में,इसके अलावा सरायकेला खरसावां जिला में आदित्यपुर आकाशवाणी भवन के पास अपना प्रोटोकॉल तोड़कर लोगों से गर्म जोशी से मिली। जहां लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तकरीबन 500 मी सड़क पर पैदल भी चलीं। इसके अलावा और एक यादगार पल उस वक्त आया। जब सरायकेला जिले के आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर का 15वां दीक्षांत समारोह उस समय चर्चा में आ गया, जब कार्यक्रम में शामिल भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन के दौरान मंच से ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरे सभागार में मौजूद लोग सोचने लगे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जिन विद्यार्थियों को मेडल और डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं, उन्हें देखकर अन्य छात्र-छात्राओं के चेहरों पर अपेक्षित खुशी नजर नहीं आ रही है। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो तालियां बजाने से मना किया गया हो या फिर विद्यार्थियों को भूख लग गई हो। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को कई लोग व्यंग्य के रूप में भी देख रहे हैं।राष्ट्रपति ने आगे कहा कि “देने वाला ही पाता है। आज अगर आप दूसरों के लिए तालियां बजाएंगे, तो कल आपके लिए भी तालियां बजेंगी।” राष्ट्रपति के इस कथन ने समारोह में मौजूद छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर संबोधित किया और माहौल को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया।राष्ट्रपति के इस संदेश के तुरंत बाद पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस तरह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने झारखंड दौरे को ऐतिहासिक बनाती रहीं।

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