
2025: चुनौतियों और सबकों का साल
2025 दुनिया के लिए एक उथल-पुथल भरा साल रहा। राजनीतिक बदलावों, जारी संघर्षों, जलवायु आपदाओं और तकनीकी प्रगति ने वैश्विक परिदृश्य को नया आकार दिया। डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में वापसी से लेकर यूक्रेन-रूस युद्ध के चौथे साल तक, यह साल सहयोग की कमी और चुनौतियों की अधिकता वाला रहा। भारत में महाकुंभ की भव्यता से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक कई घटनाएं चर्चा में रहीं। आइए नजर डालते हैं प्रमुख घटनाओं पर और उनसे मिलने वाली सीखों पर।वैश्विक स्तर पर प्रमुख घटनाएंट्रंप की दूसरी पारी: जनवरी में ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभाला। उनकी टैरिफ नीतियां, इमिग्रेशन सख्ती और विदेश नीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। यूक्रेन युद्ध में अमेरिकी सहायता बदली, जबकि गाजा में अनिश्चित सीजफायर हुआ।
जारी युद्ध: यूक्रेन-रूस संघर्ष चौथे साल में रहा, रूस ने क्षेत्रीय लाभ बनाए लेकिन भारी कीमत चुकाई। गाजा में इजराइल-हमास युद्ध में सीजफायर के बावजूद तनाव बना रहा। सूडान और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष बढ़े।
जलवायु संकट: 2025 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, कैलिफोर्निया की जंगल आग, एशिया में बाढ़ और चक्रवात देखे गए। दक्षिण-पूर्व एशिया में चक्रवातों से हजारों मौतें हुईं, नुकसान अरबों डॉलर का। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन ने इन आपदाओं को और घातक बनाया।
AI की छलांग: ओपनएआई के चैटजीपीटी-5, गूगल के जेमिनी 3 जैसे मॉडल्स ने AI को नई ऊंचाई दी। पेरिस AI समिट में रेगुलेशन पर चर्चा हुई, लेकिन निवेश ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा।
अन्य उल्लेखनीय: पोप फ्रांसिस की मौत के बाद पहला अमेरिकी पोप लियो XIV चुना गया। स्पेस में कमर्शियल लूनर लैंडिंग सफल हुई।
भारत में महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, लेकिन कुछ दुर्घटनाएं भी हुईं। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर स्ट्राइक, दिल्ली विधानसभा में भाजपा की जीत और इंडिगो संकट जैसी घटनाएं रहीं।इन घटनाओं से क्या सीख?2025 ने हमें कड़ी सबक दिए:शांति की अनिवार्यता: युद्धों से लाखों प्रभावित हुए। सीख – डिप्लोमेसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही स्थायी शांति ला सकता है। ट्रंप-जेलेंस्की बातचीत जैसे प्रयास दिखाते हैं कि संवाद जरूरी है।
जलवायु कार्रवाई की तत्काल जरूरत: आपदाओं से साफ है कि ग्लोबल वॉर्मिंग अब हकीकत है। सीख – रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबल प्रथाओं को तेज करें, नहीं तो नुकसान बढ़ेगा।
AI का जिम्मेदार उपयोग: प्रगति के साथ एथिकल मुद्दे उठे। सीख – रेगुलेशन, प्राइवेसी और बायस से बचाव जरूरी, ताकि तकनीक मानवता की सेवा करे।
एकता और लचीलापन: महाकुंभ जैसे आयोजन और स्वास्थ्य उपलब्धियां दिखाती हैं कि मिलकर बड़ी चुनौतियां पार की जा सकती हैं। सीख – सहानुभूति और सहयोग बढ़ाएं।
अनिश्चितता में अनुकूलन: राजनीतिक बदलावों से दुनिया बदलती है। सीख – लंबी सोच और अनुकूलन अपनाएं।
2025 ने याद दिलाया कि दुनिया जुड़ी हुई है – एक जगह की समस्या सबको प्रभावित करती है। उम्मीद है 2026 बेहतर सहयोग और प्रगति लाए।