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इंदौर खबर

हम रोज़ सुनते हैं —
कहीं लोग जहरीली शराब से मर गए…
लेकिन क्या आपने सुना है —
इंदौर में लोग
नगर निगम का पानी पीकर मर गए।
हाँ दोस्तो,
अब तक 14 मौतें,
हजारों बीमार,
और 30 से ज़्यादा लोग ICU में।
लेकिन घबराइए मत…
क्योंकि इंदौर तो
स्वच्छता में नंबर 1 है!
सवाल ये है —
अगर नाली साफ़ है,
लेकिन नल से ज़हर आ रहा है,
तो वो स्वच्छता किस काम की
नगर निगम इतना एक्टिव है कि
अतिक्रमण दिखा नहीं कि
घर तोड़ने पहुँच जाता है।
लेकिन जब लोग
दिनों तक शिकायत करते रहे —
“पानी गंदा है”
“पानी बदबूदार है”
“पानी पीने लायक नहीं है”
तब सिस्टम…
सो रहा था।
और जब लोग मर गए…
तब फाइलें चलीं,
तब अफसर जागे,
तब बयान आए।
क्या सिस्टम को
लाशों की गिनती चाहिए थी
एक्शन लेने के लिए?
सोचिए उस माँ को
जिसने अपने बच्चे को
ज़हरीला पानी पिला दिया…
गलती किसकी थी?
सोचिए उस मज़दूर को
जो दिन भर मेहनत के बाद
घर आकर पानी पी गया…
और ज़िंदगी हार गया।

ये हादसा नहीं है दोस्तो…
ये लापरवाही से की गई हत्या है।
और अगर आज हम चुप रहे,
तो कल
ये ज़हर
किसी और के नल से भी आएगा।

इंदौर को सिर्फ
नंबर 1 शहर नहीं,
न्यायपूर्ण शहर बनाना होगा।
सवाल पूछो।
आवाज़ उठाओ।
और याद रखो —
स्वच्छ शहर वो नहीं होता
जहाँ सड़कें चमकें,
स्वच्छ शहर वो होता है
जहाँ इंसान ज़िंदा रहे।

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