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हयाघाट के मझौलिया में स्वच्छता अभियान के नाम पर 'अवैध वसूली'

बिहार सरकार की 'लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान' का उद्देश्य गांवों को कचरा मुक्त बनाना है, लेकिन दरभंगा जिले के हयाघाट ब्लॉक से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ मझौलिया पंचायत में स्वच्छता के नाम पर गरीब ग्रामीणों की जेब काटी जा रही है और पैसे न देने पर उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित करने की धमकी दी जा रही है।"

"यह मामला है हयाघाट प्रखंड के मझौलिया पंचायत (वार्ड संख्या 08) का। इस गांव के निवासी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि इलाके में नियुक्त सफाई कर्मचारी और सुपरवाइजर कचरा उठाने के बदले 1000 रुपये की अवैध मांग कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि सुपरवाइजर एक महिला है, लेकिन वसूली का सारा खेल उसका पति संचालित कर रहा है।"

अवैध वसूली: हर घर से ₹1000 की मांग।
दबंगई: पैसे न देने पर मारपीट और सरकारी लाभ रोकने की धमकी।
लापरवाही: कचरा गाड़ियाँ खराब, घरों के बीच ही डंप किया जा रहा है कचरा।
मनमानी: सुपरवाइजर की मर्जी से ही उठता है गांव का कूड़ा।

"ग्रामीणों का कहना है कि जब वे सफाई कर्मचारियों से सवाल करते हैं, तो वे सुपरवाइजर का नाम लेकर पल्ला झाड़ लेते हैं। आलम यह है कि सरकारी नियम ताक पर हैं। जहाँ यह सेवा नि:शुल्क या न्यूनतम शुल्क पर होनी चाहिए, वहाँ खुलेआम भ्रष्टाचार का नंगा नाच चल रहा है। कचरा गाड़ियाँ कबाड़ हो चुकी हैं और गांव के बीचों-बीच जमा कचरा अब बीमारियों को दावत दे रहा है।"

"स्थानीय अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन इन भ्रष्ट कर्मियों पर नकेल कसेगा? क्या मझौलिया के गरीबों को इस अवैध वसूली से राहत मिलेगी?

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