
आजादी हेतु शहीद हुए प्रयागराज के 4 शहीदों को याद किया गया....
प्रयागराज। प्रयागराज में आज के दिन ही 4 जनवरी को चार भारतीयों को घोड़े की टॉप से कुचल कुचल कर क्रूरता पूर्वक शहीद कर दिया गया था। आज उन्हें शहीदवॉल पर श्रद्धांजलि नमन कार्यक्रम संपन्न हुआ।पुलिस बैंड ने उनके सम्मान में राष्ट्र धुन बजायी।
शहीदवॉल के संस्थापक वीरेन पाठक ने बताया कि आज के दिन वह क्रूर घटना घटी थी जिसके बाद यह कहावत प्रचलित हो गई *कि क्या अंग्रेज हो*। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी 1932 को आजादी के लिए शांतिपूर्वक एक जुलूस चौक से चला। बलोच रेजीमेंट और अंग्रेज अधिकारियों ने इसे सामने से रोक लियाऔर लेट जाने का आदेश दिया। जब आजादी चाहने वालों ने अंग्रेजों का आदेश मानने से इनकार कर दिया तो अंग्रेज अधिकारियों ने इन पर घोड़े चढ़ा दिए। घोड़े की टॉप से कुचल कुचल कर इन्हें इतना घायल कर दिया कि यह सभी भारत माता के लिए शहीद हो गए। आज यही 4 बलिदानियों
नियामउल्ला, सूरज नारायण,
सोहन लाल और हरनारायण की शहादत को सम्मान देने के लिए पुलिस बैंड ने राष्ट्र धुन बजायी तथा दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।
कार्यक्रम को के के मिश्रा ने मुख्य रूप से सम्बोधित किया। उन्होने कहा कि हम देशवासियों को इन भारतीयों के बलिदान को याद रखते हुए, इनके सपनो का भारत बनाना है।