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2026/और पर्यावरण

2026 की शुरुआत लोगों ने बड़े चाव और उत्साह के साथ की। नए साल के स्वागत में सड़कों का विस्तार, नए भवनों का निर्माण और तेज़ विकास की योजनाएँ सामने आईं। इन्हीं योजनाओं के बीच रास्ते के कई सखुआ के पेड़ काट डाले गए। ये पेड़ वर्षों से उस मार्ग के साक्षी थे—धूप में छाया देते, पक्षियों को आश्रय देते और हवा को शुद्ध रखते थे। शुरुआत में लोगों को लगा कि चौड़ी सड़कें और तेज़ यातायात प्रगति का संकेत हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद कमी महसूस होने लगी। गर्मी बढ़ने लगी, पक्षियों की चहचहाहट कम हो गई और रास्ता सूना-सा लगने लगा। तब कुछ लोगों ने सवाल उठाए—क्या विकास का अर्थ प्रकृति को खो देना है? धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ी। पेड़ों के महत्व पर चर्चा होने लगी और नए पौधे लगाने की पहल शुरू हुई। 2026 ने सिखाया कि सच्ची शुरुआत वही है जिसमें विकास और प्रकृति साथ-साथ चलें।......

🙏🌞रांची से राहे हाहे रोड में गंगा घाट से नाया टोली
... जो की महिलौंग वन विभाग छेत्र में आता
सालों से ये लोग ऑफ़िस में कुर्सी तोड़ रहे हैं 🌞 🙏

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