
नेहरू जी ने शौचालय क्यों नहीं बनवाया?
विषगुरु युग की सबसे ऐतिहासिक बहस: नेहरू जी ने शौचालय क्यों नहीं बनवाया?
आजकल देश में सबसे गहरी, गंभीर और राष्ट्रनिर्माण से जुड़ी बहस यही चल रही है कि
“नेहरू ने शौचालय नहीं बनवाया!”
मानो नेहरू जी का पूरा समय इसी बात में निकल गया हो कि
“चलो पहले टॉयलेट काटते हैं,
खाने-पीने, खेती, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान बाद में देखेंगे।”
भाइयों-बहनों,
नेहरू ने शौचालय नहीं बनवाया,
क्योंकि उस वक़्त देश को पेट की भूख लगी थी, पिछवाड़े की नहीं।
1947 का भारत कोई इंस्टाग्राम रील वाला भारत नहीं था,
जहाँ फ़िल्टर लगा दो, सब चमक जाए।
उस दौर में तुम्हारे दादा, उनके दादा और उनके भी दादा
अंग्रेज़ी राज में पैदा हुए थे—
जहाँ
• दाने-दाने को तरसते थे
• अकाल में 10-10 लाख लोग मर जाते थे
• भूख ऐसी कि कौवा भी आँख निकाल ले जाए
• और पेट की आवाज़, देशभक्ति के नारों से ज़्यादा तेज़ होती थी
अब ज़रा सोचो—
जब थाली खाली हो,
तो क्या कोई समझदार आदमी बोलेगा:
“पहले हगने की व्यवस्था करो, खाना बाद में देखेंगे”?
नहीं।
ये आइडिया सिर्फ़ उसी गैंग को आ सकता है
जो आज़ादी का जश्न मनाने के बजाय
गांधी जी की हत्या का सपना देख रहा था।
नेहरू पागल नहीं थे।
वे जानते थे—
पहले खेती,
फिर उद्योग,
फिर शिक्षा,
फिर विज्ञान,
फिर संस्थान,
और उसके बाद बाकी सुविधाएँ।
इसलिए आज़ादी के बाद सबसे पहले क्या हुआ?
• IIT
• IIM
• AIIMS
• BHEL
• SAIL
• ISRO की नींव
• भाखड़ा नंगल जैसे बाँध
• कृषि विश्वविद्यालय
• सार्वजनिक क्षेत्र की फैक्ट्रियाँ
इतने संस्थान बने कि
अगर उनके नाम कागज़ पर लिखकर तौलो,
तो नॉन-बायोलॉजिकल महापुरुष
खुद तराज़ू के एक पलड़े में उड़ जाएँ।
अब सवाल पूछते हैं—
“नेहरू ने क्या किया?”
तो ज़रा यह भी बताओ,
जब नेहरू यह सब कर रहे थे,
तब तुम्हारा संगठन क्या कर रहा था?
उत्तर आसान है:
• अंग्रेजों की दलाली
• क्रांतिकारियों के खिलाफ मुखबिरी
• आज़ादी की लड़ाई से दूरी
• और बदले में सरकारी पेंशन
यानी देश भूखा मर रहा था,
और ये लोग आराम से पेंशन खा रहे थे।
नेहरू के भाषण उठाकर देख लो—
हर जगह एक ही चिंता दिखेगी:
“देश में किसी को भूखा नहीं सोना चाहिए।”
ये कोई जुमला नहीं था।
25 साल में भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया।
आज जो पेट भरकर
नेहरू को गाली दे रहा है,
वो भी उसी सिस्टम की देन है।
और अब 11 साल पूरे हो गए—
बताओ ज़रा,
एक भी ऐसा संस्थान बताओ
जो आने वाली 50 साल की पीढ़ी याद रखे?
नाम बताओ—
मोदी मेडिकल इंस्टिट्यूट?
मोदी साइंस सेंटर?
मोदी रिसर्च यूनिवर्सिटी?
नहीं।
बस—
• पोस्टर
• भाषण
• फोटो
• और शौचालय की राजनीति
इतिहास को समझने के लिए दिमाग़ चाहिए,
व्हाट्सऐप फ़ॉरवर्ड नहीं।
नेहरू को कोसने से पहले
इतना तो कर लो—
थोड़ा पढ़ लो,
थोड़ा सोच लो,
और हाँ…
दिमाग़ में भी एक शौचालय बनवा लो,
ताकि गंदगी वहीं रुके, ज़ुबान तक न आए।