फैसला • पंचायत परिसीमन व पुनर्गठन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एसएलपी खारिज राजस्थान में 15 अप्रैल तक कराने होंगे पंचायत चुनाव : सुप्रीम कोर्ट
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। सोमवार को कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूरी कर ली जाए। कोर्ट ने पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली राजस्व ग्राम सिंहानिया सहित अन्य गांवों की एसएलपी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी और चुनावी प्रक्रिया शुरू है, ऐसे में दखल देना उचित नहीं है।एलएलपी में राजस्थान हाईकोर्ट के 14 नवंबर के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरा करने और पंचायत व निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने का निर्देश दिया गया था। प्रार्थियों का कहना था कि परिसीमन में उनके गांवों को बहुत न दूर एक अन्य पंचायत से जोड़ा है। - वहां पहुंचने में भौगोलिक स्थिति सड़क संपर्क की कमी और दूरी । संबंधी दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। ऐसा परिसीमन स्थानीव निवासियों के लिए कई परेशानियां पैदा करेगा। इसके जवाब में राज्य सरकार के एएजी शिवमंगल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार परिसीमन की पूरी प्रक्रिया 31 ली है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2025 से पहले पूरी कर मतदाता सूची बनाने का निर्देश भी दे दिया हैपरिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं होता बल्कि इसमें वई कारकों पर भी विचार होता है। इनमें जनसंख्या, प्रशासनिक, सुशासन की आवश्यकताएं, कलेक्टर की रिपोर्ट और मंत्रिमंडल की मंजूरी भीहै। मामले में दखल देने से इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा और कई ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव होगा। कोर्ट ने सरकार की दलीलों से सहमत होकर पंचायत परिसीमन व पुनर्गठन को चुनौती देने वाली एसएलपी खारिज कर दी।30वन स्टेट वन इलेक्शन का फेल रहा फॉर्मूला, प्रशासक लगाएवन स्टेट वन इलेक्शन की कड़ी में ग्राम पंचायतों में प्रशासक लगाए गए थे। यह पहला मौका था जब पूर्व सरपंचों को प्रशासक बनाया गया था। इसके बाद पंचायत समितियों और परिषदों का कार्यकाल पूरा हुआ। ऐसे में कोर्ट ने समय पर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। उधर, समय पर चुनाव नहीं होने से सरकारी खर्च 20 से 25 प्रतिशत अब और महगा हो सकता है।30% ग्राम पंचायतें और 25% समितियां बढ़ींवन स्टेट वन इलेक्शन का फेल रहा फॉर्मूला, प्रशासक लगाएवन स्टेट वन इलेक्शन की कड़ी में ग्राम पंचायतों में प्रशासक लगाए गए थे। यह पहला मौका था जब पूर्व सरपंचों को प्रशासक बनाया गया था। इसके बाद पंचायत समितियों और परिषदों का कार्यकाल पूरा हुआ। ऐसे में कोर्ट ने समय पर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। उधर, समय पर चुनाव नहीं होने से सरकारी खर्च 20 से 25 प्रतिशत अब और महगा हो सकता है।% ग्राम पंचायतें और 25% समितियां बढ़ींचुनाव की तैयारियों में पहले से ही जुट गया था निर्वाचन आयोगपंचायत चुनाव को लेकर आयोग पहले ही तैयारी कर रहा है। बहरहाल पंचायत चुनाव से इसकी शुरुआत होने जा रही है। वोटर लिस्ट का प्रारूप 29 जनवरी को जारी होगा और 25 फरवरी को अंतिम प्रकाशन होगा। उधर वोटर लिस्ट तैयार करने के काम से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों पर रोक हैसबसे बड़ा चुनावः अबकी बारइस बार होने वाला पंचायत चुनाव राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा चुनाव होगा। वजह 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही पंचायत समितियों की संख्या भी 25 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा जिला परिषद भी इस बार पिछली बार की तुलना में 33 से बढ़कर 41 हो गई है। इसके अलावा खर्ची सीमा पंचायत चुनाव की दो गुना बढ़ने से इस बार का पंचायत चुनाव अब तक का सबसे बड़ा चुनाव होने जा रहा है। पंचायतों में सवा लाख से अधिक वार्ड होने की वजह से कई नए चेहरों की राजनीति में एंट्री भी होगी।सबसे बड़ा चुनावः अबकी बारइस बार होने वाला पंचायत चुनाव राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा चुनाव होगा। वजह 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही पंचायत समितियों की संख्या भी 25 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा जिला परिषद भी इस बार पिछली बार की तुलना में 33 से बढ़कर 41 हो गई है। इसके अलावा खर्ची सीमा पंचायत चुनाव की दो गुना बढ़ने से इस बार का पंचायत चुनाव अब तक का सबसे बड़ा चुनाव होने जा रहा है। पंचायतों में सवा लाख से अधिक वार्ड होने की वजह से कई नए चेहरों की राजनीति में एंट्री भी होगी।