logo

सर्दी की गुनगुनाती धूप (एक कविता)

आज फिर मुझे धूप ने बुलाया
वही गुनगुनाती, हल्का हल्का सहलाती
मुझे धूप ने बुलाया,

सब अच्छा लगता बैठे बैठे खुद को सहलाते
आस पास नज़रे घुमाते ,
उस सर्द हवा से सिमटते सकुचाते,
फिर हिम्मत बंधाते,
आज फिर धूप ने बुलाया है

देखते सूरज को की गर्मी अभी बाकी है
सूरज है अभी आसमां में , जीने के दिन अभी बाकी है
बस देखकर खुद को गर्म महसूस करते हैं
कुछ और जीने की हिम्मत करते है
आज फिर धूप ने बुलाया है

आज फिर धूप निकली है,
आज फिर धूप ने बुलाया है

0
345 views