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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित 90 डिग्री पुल बंद हो गया

भोपाल, 09 जनवरी 2026: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में स्थित रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) ने पिछले साल जून में खूब सुर्खियां बटोरीं। यह पुल, जिसे अब लोग '90 डिग्री पुल' के नाम से पुकारते हैं, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनवाया गया था। इसका उद्देश्य महामाई का बाग, पुष्पा नगर और ऐशबाग स्टेडियम के आसपास के भीड़भाड़ वाले इलाकों को जोड़ना था, लेकिन इसके डिजाइन में एक तीखा 90 डिग्री का मोड़ होने के कारण यह विवादों में घिर गया। पुल की कुल लंबाई 648 मीटर और चौड़ाई 8.5 मीटर है, जबकि इसकी निर्माण लागत 18 करोड़ रुपये बताई गई है । पुल का निर्माण पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) की देखरेख में हुआ, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियोज ने इसकी डिजाइन पर सवाल खड़े कर दिए।
पुल के इस अनोखे मोड़ की वजह से वाहनों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया। स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इतना तीखा मोड़ हादसों को न्योता देता है, खासकर तेज रफ्तार वाहनों के लिए। निर्माण के दौरान दीवार खड़ी करके मोड़ को सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं साबित हुई जून 2025 में पुल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मीम्स और जोक्स की बाढ़ आ गई। लोगों ने इसे 'ज्योमेट्री का सबक' तक कहा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद इसकी खामियों को स्वीकार किया और कहा कि पुल का उद्घाटन तब तक नहीं होगा जब तक इंजीनियर मोड़ को ठीक नहीं कर लेते।
विवाद बढ़ने पर मध्यप्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। 29 जून 2025 को सात इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया, जिसमें दो चीफ इंजीनियर भी शामिल थे।ba3c01 इनमें से कुछ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी के थे, जो डिजाइन और निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरकार का कहना था कि डिजाइन में गंभीर खामियां थीं, जिससे जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। बाद में एक एक्सपर्ट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मोड़ का एंगल वास्तव में 118-119 डिग्री है, न कि 90 डिग्री जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था। हाई कोर्ट में दाखिल इस रिपोर्ट ने विवाद को नया मोड़ दिया, लेकिन फिर भी डिजाइन की आलोचना जारी रही।
लागत के मामले में, 18 करोड़ रुपये की इस परियोजना में से अधिकांश फंड रेलवे और राज्य सरकार से आया। निर्माण 2023 में शुरू हुआ था और 2025 में पूरा हुआ।हालांकि, मोड़ की वजह से पुल अभी भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल ट्रैफिक जाम को कम करने में मददगार साबित हो सकता था, लेकिन डिजाइन फॉल्ट ने सब कुछ बिगाड़ दिया। विपक्षी पार्टियों ने इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताते हुए जांच की मांग की।
पुल के दोनों छोरों पर पक्की दीवारें खड़ी कर दी गई हैं, जिससे किसी भी वाहन या पैदल यात्री का आवागमन असंभव हो गया है। एक हालिया रिपोर्ट (9 जनवरी 2026) में इसे "पारिवारिक बंटवारा" जैसा बताया गया है, जहां पुल बीच में दीवार से अलग-थलग पड़ गया है।
यह कार्रवाई पुल को अनधिकृत उपयोग से बचाने और आगे सुधार कार्यों के लिए की गई है। सरकार ने पहले इंजीनियरों पर कार्रवाई की, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया, और नया डिजाइन/विस्तार (टर्निंग रेडियस बढ़ाना) पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक पुल खोलने की कोई आधिकारिक तारीख नहीं आई है।

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