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MP अजब है, गजब है! गोबर–गौमूत्र रिसर्च के नाम पर 3.5 करोड़ की चपत, जबलपुर की यूनिवर्सिटी सवालों के घेरे में

जबलपुर 09-01-2026 से बड़ी खबर है
जिस गोबर–गौमूत्र को “देसी विज्ञान” और “स्वदेशी रिसर्च” का प्रतीक बताकर जनता के सामने परोसा गया, वही अब 3.5 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की वजह बनता दिख रहा है। मध्यप्रदेश की नामी यूनिवर्सिटी में हुए इस मामले ने न सिर्फ प्रशासन, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जबलपुर स्थित Jawaharlal Nehru Krishi Vishwa Vidyalaya में गोबर–गौमूत्र से जुड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए। आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स में न तो ज़मीन पर ठोस रिसर्च दिखी, न ही खर्च का पारदर्शी हिसाब, लेकिन फाइलों में सब कुछ “सफल” दर्शा दिया गया।
क्या हैं मुख्य आरोप?
रिसर्च के नाम पर बिना ठोस नतीजों के भारी फंड रिलीज
उपकरण, कंसल्टेंसी और ट्रायल के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर बिलिंग
कुछ प्रोजेक्ट्स कागज़ों तक सीमित, फील्ड में काम न के बराबर
आंतरिक ऑडिट में अनियमितताओं के संकेत (जांच/स्पष्टीकरण की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है)
प्रशासन क्या कहता है?
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सभी खर्च नियमों के तहत हुए हैं और यदि कहीं कोई गड़बड़ी सामने आती है तो जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। वहीं, विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
बड़ा सवाल
अगर रिसर्च के नाम पर करोड़ों खर्च हो सकते हैं, तो उसका लाभ किसानों, समाज और विज्ञान को कहां मिला?
और अगर आरोप सही हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
फिलहाल मामला जांच/आरोपों के दायरे में है, अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे। लेकिन इतना तय है—
MP अजब है, गजब है… और इस बार सवाल सीधे करोड़ों के “रिसर्च” पर हैं।

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