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विश्व हिंदी दिवस की सभी हिंदी भाषियों को हार्दिक शुभकामनाएं

भारतीय अस्मिता तथा गौरव तथा व्यवहार का सूक्ष्म चित्रांकन करने वाली मातृभाषा हिंदी हृदय में ऐसे विराजमान है जिस प्रकार मां के हृदय में पुत्र विराजमान होता है/ 18 बोलियां तथा अनेकों क्षेत्रीय प्रभाव अपने अंदर समेटे इस व्यापक भाषा की तुलना अन्य किस भाषा से नहीं की जा सकती/ जो भाषा अपने अंदर के परिमार्जन को सहर्ष स्वीकार करती हो उस भाषा को दिव्या- रम्य कह देना स्वाभाविक ही है / व्यावहारिकता की दृष्टि से इस भाषा ने जो आयाम स्थापित किया है वह अद्भुत तथा विहंगम है / ग्रामीण पटल पर जब किसी मनुष्य को अपने व्यावहारिक स्वरूप में हिंदी का प्रयोग करते देखा जाता है तो वह दृश्य किसी मनोरम दृश्य से कम नहीं होता/. स्वयं लिखा काव्य पाठ *
*नई प्रीत है, नई गीत है*
*दुखियो के मन का मीत है*
*भावना का असीम ज्वार है*
*कवियों का यें प्यार है*
*नेताओं का बोल है यें*
*वाक्य का रस तोल है*
*यें सितारों सी भव्य है*
*रागो का यह गव्य है*
*यें आंदोलन से प्रेरित है*
*यें शहीदों से उद्वेलित है*
*यें मानक है गुणवत्ता का*
*यें पर्याय है सत्ता का*
*यें भाषारूपी सागर है*
*यें मिट्टी रूपी गागर है*
*यें मराठा है, यें सिंधी है*
*यें माथे पर लगी बिंदी है*
*यें भावना रूपी हिन्दी है/*
*यें भावना रूपी हिन्दी है /*
लेखक -अभिषेक धामा

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