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वक्त को यूँ ही न बर्बाद करें, जो संघर्ष के साथी उन्हें याद करें। अगर सच में सच्चे इंसान हो तो इंसानियत को ज़िंदाबाद करें

डीएसपी नहीं जानती..एक मित्र जो मेहनत करता था बहुत कम पढ़ता था..हम लोग जब पन्ना में उत्कृष्ट विद्यालय में 9-12 तक पढ़ाई किए तो हमें एक मित्र मिला भोजराज यादव जिसके पास साइकिल थी। साइकिल से पन्ना की घाटी चढ़ता था और छुट्टी में घर भी साइकिल से लौटता था। खाना बनाने के लिए लकड़ी लेने जाते थे तो कुछ दूर सिर बोझ पर लाते और फिर भोजराज की साइकिल में रख देते थे। आज भी हमारा मित्र शादी विवाह में 30-50 किलोमीटर दूर साइकिल से ही जाता है। जैसे ही हमने फ़ोन लगाया कि आपसे मिलने आ रहे हैं तो साइकिल से रिसीव करने नहर तक आ गए। एक बार बैठने की ज़िद में फोटो खिंचा ली और मित्र की अम्मा जो ये नहीं जानती कि डीएसपी क्या होता है फिर मित्र ने समझाया कि पुलिस वाले हैं तो अम्मा ने हाथ जोड़ लिए।
वक्त को यूँ ही न बर्बाद करें,
जो संघर्ष के साथी उन्हें याद करें।
अगर सच में सच्चे इंसान हो तो
इंसानियत को ज़िंदाबाद करें। #मित्रता #दोस्ती #साइकिल #गाँव #डीएसपी

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