
सेमिनार की तालियों से कटघरे तक: कैनविज, ‘बाल्टी–मग्गा’ कहानी और कन्हैया गुलाटी के बड़े दावे
सेमिनार की तालियों से कटघरे तक: कैनविज, ‘बाल्टी–मग्गा’ कहानी और कन्हैया गुलाटी के बड़े दावे
खुटार/बरेली:- कैनविज कंपनी के एक सेमिनार में कन्हैया गुलाटी द्वारा सुनाई गई ‘बाल्टी और मग्गा’ की कहानी उस समय मौजूद लोगों के लिए प्रेरणादायक और मनोरंजक बताई गई थी। लेकिन आज वही कहानी कई निवेशकों के लिए कड़वी सच्चाई और तंज का प्रतीक बनती जा रही है।
सेमिनार के दौरान गुलाटी ने उदाहरण देते हुए कहा था कि एक जगह सिर्फ बाल्टी बिक रही है, जबकि उनकी कंपनी बाल्टी के साथ मग्गा फ्री दे रही है। उन्होंने मंच से सवाल किया—
“अब बताइए, बिक्री किसकी होगी? हमारी कंपनी की या उस दुकानदार की?”
इस सवाल पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और एक सुर में कहा कि कैनविज की ही बाल्टी बिकेगी।
इसी कहानी को आगे बढ़ाते हुए गुलाटी ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा—
“मग्गा बडा या जीजा!”
इस पर कार्यक्रम में मौजूद एक महिला ने जवाब दिया—
“जीजा बड़ा है, मग्गा नहीं।”
गुलाटी ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा—
“जीजा जी सिर्फ बाल्टी बेच रहे हैं, और हमारी कंपनी बाल्टी के साथ मग्गा फ्री दे रही है। अब बताइए, क्या करेंगे—जीजा की दुकान से खरीदेंगे या हमारी कंपनी से?”
इस पर महिला ने जवाब दिया—
“जीजा की दुकान से नहीं, आपकी दुकान से खरीदेंगे, क्योंकि मग्गा बड़ा है।”
इस संवाद पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। इसी जोश के माहौल में गुलाटी ने बड़े-बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि 2025 तक कैनविज भारत की सबसे बड़ी कंपनी होगी, उनका नाम देश-विदेश में होगा, और वे टाटा, बिरला, अंबानी और अडानी जैसी दिग्गज कंपनियों को भी पीछे छोड़ देंगे।
हालांकि, समय के साथ तस्वीर बदलती चली गई। आज वही कहानी सोशल मीडिया और पीड़ित निवेशकों के बीच व्यंग्य और आरोपों के साथ दोहराई जा रही है। लोग कह रहे हैं कि जिस ‘मग्गा फ्री’ के लालच में उन्होंने भरोसा किया, वही उनके लिए नुकसान और भ्रम का कारण बन गया।
निवेशकों का आरोप है कि सेमिनारों में सुनाई गई आकर्षक कहानियों और बड़े दावों के पीछे हकीकत कुछ और थी। आज कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या उस वक्त वे समझ ही नहीं पाए कि असल में उन्हें ही “मग्गा” बनाया जा रहा है।
फिलहाल कैनविज और कन्हैया गुलाटी से जुड़े मामलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जांच, शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अब यह कहानी सिर्फ एक बिज़नेस उदाहरण नहीं, बल्कि विश्वास, सपनों और ठगे जाने के आरोपों की कहानी बन चुकी है।
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