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महाराजाधिराज राजा भोज परमार जयंती 25 जनवरी को जोधपुर में मनाई जाएगी

जालोर/जोधपुर (दलपतसिंह भायल )
महाराजाधिराज राजा भोज परमार (पंवार) की जयंती 25 जनवरी 2026 को जोधपुर में भव्य रूप से मनाई जाएगी। जयंती समारोह का आयोजन मारवाड़ राजपूत सभा भवन, पावटा बी रोड, जोधपुर में किया जाएगा।

राजपूत समाज के जागरूक युवा पूरणसिंह काबावत आकोली ने जानकारी देते हुए बताया कि महाराजाधिराज राजा भोज परमार भारतीय इतिहास के महानतम राजाओं में से एक थे। वे मालवा के प्रतापी शासक थे, जिन्होंने 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच धार (मालवा की राजधानी) से अपने शासन का संचालन किया। राजा भोज एक कुशल योद्धा, विद्वान, कवि, प्रजापालक एवं महान वास्तुकार थे।

उन्होंने सरस्वती मंदिर, भोजशाला (धार), विशाल भोजताल (झील) तथा भोजपुर में 18 फीट ऊंचे विशाल शिव मंदिर – भोजेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया। साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने सरस्वतीकण्ठाभरण, श्रृंगारमञ्जरी और चम्पूरामायण जैसे अनेक महान ग्रंथों की रचना की।
राजा भोज ने कई युद्ध लड़े और अपने शौर्य से बड़े आक्रांताओं को परास्त किया। उनकी विद्वता और न्यायपूर्ण शासन के कारण आज भी कहावत प्रचलित है—

“कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली”, जो उनकी महानता को दर्शाती है।
राजा भोज परमार (पंवार) वंश के नौवें राजा थे। इसी परमार वंश में न्यायप्रिय सम्राट वीर विक्रमादित्य परमार और महान योद्धा जगदेव परमार जैसे वीर शासकों का जन्म हुआ। कहा जाता है कि जगदेव परमार ने ब्राह्मणों द्वारा दान मांगने पर अपना सिर काटकर दान कर दिया और सिर कटने के बाद भी युद्ध करते रहे, जो उनकी अपूर्व वीरता का उदाहरण है।

आयोजकों ने बताया कि ऐसे गौरवशाली और शौर्यपूर्ण इतिहास को लंबे समय तक अंधेरे में रखा गया। यदि इस इतिहास को देश के बच्चों तक पहुँचाया जाता, तो नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और वीरता का भाव और अधिक प्रबल होता।

महाराजाधिराज राजा भोज परमार की जयंती के अवसर पर देशभर के परमार (पंवार) वंशजों को जोधपुर आमंत्रित किया गया है। विशेष रूप से जालोर जिले के काबावत परमार (पंवार) वंश की 24 पट्टी (फरगने) के राजपूत सिरदारों से अपील की गई है कि वे गांव-गांव से बड़ी संख्या में 25 जनवरी को जोधपुर पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लें और इसे अपना परम धर्म एवं लक्ष्य समझकर सहभागिता निभाएं।

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