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रात के करीब 12 बजे थे। शहर सो चुका था, लेकिन एक महिला ने ब्लिंकिट से कुछ सामान ऑर्डर किया। ऑर्डर में थे

🌙 ब्लिंकिट की रात, इंसानियत की रोशनी 🌟
रात के करीब 12 बजे थे। शहर सो चुका था, लेकिन एक महिला ने ब्लिंकिट से कुछ सामान ऑर्डर किया। ऑर्डर में थे—प्रेग्नेंसी टेस्ट किट, दर्द निवारक दवाइयाँ और चॉकलेट। 📦🍫
डिलीवरी बॉय ने जब सूची देखी, तो उसे कुछ अजीब लगा। इतनी रात में ये सामान… कहीं कोई परेशानी तो नहीं? 🤔
वह घर पहुँचा, लेकिन दरवाज़ा खुलने में देर हुई। अंदर से घबराई हुई आवाज़ आई। डिलीवरी बॉय का शक और गहरा हो गया। उसने सामान देकर जाने की बजाय संवेदनशीलता दिखाई। उसने शांति से पूछा—“मैडम, सब ठीक है ना?” 💬
महिला की आँखें भर आईं। वह अकेली थी और बहुत घबराई हुई थी। डिलीवरी बॉय ने बिना समय गंवाए कस्टमर सपोर्ट को कॉल किया, पास की महिला हेल्पलाइन की जानकारी दी और ज़रूरत पड़ने पर एम्बुलेंस बुलाने की पेशकश की। 🚑📞
कुछ देर बाद महिला को मदद मिल गई। वह सुरक्षित थी। जाते-जाते डिलीवरी बॉय ने बस इतना कहा—“मैडम, घबराइए मत, आप अकेली नहीं हैं।” 🙏
यह कहानी बताती है कि समझदारी, इंसानियत और एक छोटा-सा सवाल किसी की ज़िंदगी में बड़ा फर्क ला सकता है।
आज के दौर में यही है असली सुपरहीरो। 🦸‍♂️✨
👍 सलाम है उस डिलीवरी बॉय को!
❤️ इंसानियत ज़िंदाबाद!

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