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भेलारा: गाटा संख्या 1771 और 1772 पर प्रधान का 'अवैध साम्राज्य', चारागाह की जमीन भी निगली

भेलारा: गाटा संख्या 1771 और 1772 पर प्रधान का 'अवैध साम्राज्य', चारागाह की जमीन भी निगली
​भेलारा (स्थानीय ब्यूरो): प्रशासन की नाक के नीचे सरकारी जमीनों की लूट का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। भेलारा के ग्राम प्रधान बलिराम पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी भूमि को अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया है।
​गाटा संख्याओं ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
​ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के अनुसार, प्रधान का आलीशान मकान किसी निजी भूमि पर नहीं, बल्कि दो महत्वपूर्ण सरकारी गाटा संख्याओं पर बना है:
​गाटा संख्या 1771: जो कि सरकारी 'बंजर' भूमि के रूप में दर्ज है।
​गाटा संख्या 1772: जो कि पशुओं के लिए आरक्षित 'चारागाह' की सुरक्षित जमीन है।
​इन दोनों गाटा संख्याओं पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कर प्रधान ने न केवल राजस्व नियमों की धज्जियाँ उड़ाई हैं, बल्कि गांव के सार्वजनिक संसाधनों पर भी कब्जा जमा लिया है।
​सेटिंग के खेल में दबा लेखपाल का नोटिस
​हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण पर लेखपाल द्वारा नोटिस जारी किया जा चुका है। बावजूद इसके, निर्माण कार्य न तो रुका और न ही कोई कार्रवाई हुई। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधान ने "ऊपर से नीचे तक" मोटी रकम खिलाकर मामले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नोटिस महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है और प्रशासनिक अधिकारी इस बड़े घोटाले पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
​ग्रामीणों की चेतावनी: "आर-पार की होगी जंग"
​भेलारा के ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल और जिलाधिकारी को शपथ पत्र के साथ शिकायत भेजने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों की मांग है कि:
​तत्काल गाटा संख्या 1771 और 1772 की पैमाइश कराई जाए।
​चारागाह की जमीन को मुक्त कराकर दोषियों पर भू-माफिया एक्ट के तहत कार्रवाई हो।
​मामले को रफा-दफा करने वाले राजस्व कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
​"सरकारी अभिलेखों में जो जमीन चारागाह और बंजर है, उस पर आलीशान मकान खड़ा होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। हम इस लड़ाई को शासन तक ले जाएंगे।" — शशि प्रकाश सिंह भेलारा ग्रामवासी

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