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रामायण मंदिर पूर्वी चम्पारण बिहार

आज यानी 17 जनवरी 2026 को विश्व की सबसे बड़ी शिवलिंग की स्थापना बिहार के पूर्वी चंपारण में स्थापित होगी हर हर महादेव 🙏🙏🙏

​महत्व: यह दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसे 'नरक निवारण चतुर्दशी' भी कहा जाता है।
​2. शिवलिंग की विशेषताएं
​यह शिवलिंग अपनी विशालता और निर्माण शैली के कारण अद्वितीय है:
​आकार और वजन: इसकी ऊंचाई 33 फीट और गोलाई भी 33 फीट है। इसका कुल वजन लगभग 210 टन (2.10 लाख किलो) है।
​सहस्रलिंगम: इस मुख्य शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिसे 'सहस्रलिंगम' कहा जाता है। माना जाता है कि 8वीं शताब्दी के बाद भारत में इस तरह के सहस्रलिंगम की स्थापना पहली बार हो रही है।
​पत्थर: इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही विशाल ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर (Monolith) को तराश कर बनाया गया है। इसे बनाने में लगभग 10 साल का समय लगा है।
​3. स्थापना समारोह के खास आकर्षण
​जलाभिषेक: शिवलिंग का अभिषेक पांच पवित्र स्थानों—कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर—से लाए गए जल से किया जाएगा।
​पुष्प वर्षा: स्थापना के समय हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की जाएगी।
​मुख्य अतिथि: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस समारोह में शामिल होने की संभावना है।
​4. मंदिर का भविष्य विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य जारी है और इसके 2030 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। यह मंदिर कंबोडिया के 'अंकोरवाट' मंदिर से भी ऊंचा और विशाल होगा। शिवलिंग के साथ-साथ यहाँ भगवान नंदी की भी एक विशाल मूर्ति स्थापित की जाएगी, जिसके लिए अयोध्या के राम मंदिर की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज से संपर्क किया जा रहा है।

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