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शुक्र का तारा अस्त होने से इस साल बसंत पंचमी पर शुभ कार्य नहीं होंगे- डॉ. शिवानंद शास्त्री

कर्नावती महानगर के शास्त्री डॉ. शिवानंद शास्त्री के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी कहा जाता है। इसी दिन खटवांग जयंती और तक्षक पंचमी का भी संयोग रहता है। सामान्यतः इस तिथि को विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य शुभ माने जाते हैं, किंतु शुक्र तारा अस्त होने से इस बार ये उपक्रम संभव नहीं है l
बसंत पंचमी का पर्व बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन ज्ञान, संगीत और कला की साधना के लिए विशेष पूजा की जाती है। पीले वस्त्र, पीले फूल, बूंदी के लड्डू, मालपुआ, खीर और पीले चावल अर्पित किए जाते हैं। बसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक इस पर्व पर वैष्णव मंदिरों में फाग महोत्सव की शुरुआत भी होती है, जहां भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर बसंत पंचमी पर माता सरस्वती का विशेष पूजन किया जाता है जिसके अंतर्गत पंचोपचार या षौडशोपचार पूजन क्रमानुसार किया जाता है। परंपरा अनुसार पूजन करने की मान्यता घर परिवार तथा क्षेत्र और तीर्थ पर बताई जाती है इस दिन माता को पीले बसंत पुष्प अर्पित करना चाहिए और श्वेत मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए।

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