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धार (मध्य प्रदेश) में 995 वर्ष पहले निर्मित भोजशाला सरस्वती मंदिर में भारत तिब्बत समन्वय संघ 23 जनवरी से शुरू करेगा अखंड पूजा अर्चना - अमरगढ़ वाला

भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़ वाला ने बताया कि राजा भोज द्वारा 1031 ई. में धार (मध्य प्रदेश) परम पवित्र भूमि पर बनाया मां सरस्वती शिक्षा मंदिर अध्ययन केंद्र एवं मंदिर जहां परएक समय में हजारों लोग बैठकर अध्ययन करते थे। इस विद्या मंदिर को जहां मां सरस्वती का साक्षात्कार जहां होता था, मुगल सम्राट खिलजी ने मस्जिद में बदलने का कार्य किया। मुगल सम्राटों ने ऐसा कोई मंदिर ऐसा नहीं छोड़ा जो हिंदुओं की आस्था का केंद्र था और जिनके कारण भारत विश्व गुरु कहलाता था। राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़ वाला ने बताया कि वहां पर राजा भोज द्वारा स्थापित वाग्देवी मां सरस्वती की मूर्ति जिसे अंग्रेज शासक इंग्लैंड ले गए जो आज लंदन म्यूजियम में है उस मूर्ति को इंग्लैंड सरकार ने भारत को वापस देने का वायदा किया है। आगामी 23 जनवरी बसंत पंचमी के दिन भारत तिब्बत समन्वय संघ लाखों हिंदुओं के साथ, अनेक हिंदू संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद व अन्य हिंदू संगठन धार (मध्य प्रदेश) में स्थित इस बहुत भोजशाला में यज्ञ-हवन, पूजा-अर्चना करेंगे जो अखंड तौर पर जारी रहेगा और हिन्दू धर्म की विशाल कर्मस्थली को हिंदू समाज वापिस अपने प्राचीन रूप में लाकर रहेगा। इस स्थल पर राजा भोज का वह आसन आज भी मौजूद है जिस पर बैठकर राजा भोज अपना शासन करता था तथा परमपिता परमात्मा का आशीर्वाद प्राप्त करता था, वह विशाल स्तंभ आज भी मौजूद है जो मंदिर के किनारे पर चिन्हित था जिस पर 1000 वर्ष बाद भी कोई जंग नहीं लगा। राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़ वाला ने कहा कि इतने साक्ष्य मौजूद होते हुए भी हिंदुओं के साथ अन्याय होता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तिब्बत समन्वय संघ का मुख्य लक्ष्य कैलाश मानसरोवर को चीन के चंगुल से मुक्त करवाना है, लेकिन हमारे प्राचीन हिंदू मंदिर जो कि मुगल शासकों की बर्बता का शिकार हुए, जब तक उन मंदिरों को छुड़वाने के लिए हिंदू जागृत नहीं होंगे तब तक हिंदू राष्ट्र सुदृढ़ नहीं होगा। राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़ वाला ने कहा कि भारत तिब्बत समन्वय संघ के कार्यकर्ता इस कार्य को पूर्ण निष्ठा व प्रयास से करेंगे एवं अपने लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे और विश्व के महान सम्राट राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती के इस मंदिर को प्राचीन रूप में लाकर रहेंगे।

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