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नप–राजस्व की कार्रवाई बेअसर, अतिक्रमण के आगे बेबस दिखा प्रशासन महिला पुलिस की गैरमौजूदगी बनी ढाल, घंटों मशक्कत के बाद भी खाली हाथ लौटी टीम

डिंडोरी — मां नर्मदा प्रकटोत्सव की तैयारियों के नाम पर चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान बुधवार को एक बार फिर प्रशासनिक नाकामी की भेंट चढ़ गया। नगर परिषद डिंडोरी, राजस्व और पुलिस के संयुक्त दल की मौजूदगी के बावजूद रानी अवंती बाई चौक से नर्मदा रोड तक अतिक्रमण जस का तस बना रहा। आलम यह रहा कि कड़ाके की ठंड में भी अफसरों को पसीना आ गया, लेकिन कार्रवाई एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी। वजह—महिला पुलिस बल की गैरमौजूदगी। बता दें कि तहसीलदार की मौजूदगी में शुरू हुई कार्रवाई घंटों चली, पर नतीजा शून्य रहा। प्रशासनिक दल ने खुद स्वीकार किया कि जिन स्थलों पर महिलाएं मौजूद हैं, वहां बिना महिला पुलिस के कार्रवाई संभव नहीं। सवाल यह है कि जब अभियान पूर्व नियोजित था, तो महिला पुलिस की तैनाती क्यों नहीं सुनिश्चित की गई? क्या यह लापरवाही नहीं, या फिर कार्रवाई टालने का सुविधाजनक बहाना?

मेकलसुता मंदिर समिति का फूटा आक्रोश --
इसी दौरान मेकलसुता मंदिर समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और मंदिर के समीप से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर तहसीलदार रामप्रसाद मार्को व नगर परिषद के राजस्व निरीक्षक आशीष कोरी से तीखी बहस हुई। समिति का कहना था कि बार-बार आग्रह के बावजूद मंदिर क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा, जबकि प्रशासन नियम-कानून की दुहाई देकर हाथ खड़े कर देता है।

दो दिन पहले ही भड़का था विवाद --
मंगलवार को नगर परिषद कार्यालय में मुख्य नगर पालिका अधिकारी से समिति सदस्यों की तीखी नोक-झोंक हो चुकी है। समझौते के बाद थाना कोतवाली से बल की मांग भी की गई, लेकिन बुधवार को भी स्थिति जस की तस रही। इससे समिति का आक्रोश और बढ़ गया।

सड़क जाम की चेतावनी --निराश समिति सदस्यों ने थाना कोतवाली में पत्र देकर साफ कर दिया है कि मेकलसुता व काली मंदिर परिसर की भूमि से अवैध कब्जा हटाने को लेकर वे लंबे समय से मौखिक व लिखित शिकायतें कर रहे हैं। प्रभावी कार्रवाई न होने की स्थिति में शांतिपूर्ण सड़क जाम के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा—जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन केवल कागजी अभियानों से संतुष्ट रहेगा, या जमीन पर ठोस कार्रवाई कर जनता का भरोसा बहाल करेगा? लिहाजा निश्चित तौर पर मां नर्मदा के प्रकटोत्सव से पहले यदि अतिक्रमण नहीं हट पाया, तो यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर बड़ा सवालिया निशान होगा।

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